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निजी डाटा में सेंध

Publish Date: January 07 2018 01:25:06pm

पिछले दिनों पंजाब से प्रकाशित एक समाचार पत्र ने आधार से संबंधित सूचनाएं कैसे लीक होती हैं उस पर एक विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट प्रकाशित होने पर एक दम हड़कंप मच गया और सरकार की तरफ से आधार को लेकर इस तरह के किसी दुरुपयोग से इंकार किया गया और कहा गया कि आधार ढांचे का दुरुपयोग करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा जारी ब्यान में आधार सूचनाएं चोरी होने का दावा खारिज करते हुए इसे शिकायत निवारण खोज सुविधा के दुरुपयोग का मामला करार दिया। आधार निर्गत करने वाली इस इकाई ने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत जानकारी सहित सभी सूचनाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। बयान में यह भी कहा गया कि आधार क्रमांक गुप्त रखने के लिए नहीं बनाया गया  है। यूआईडीएआई ने कहा, कुछ सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अधिकृत संस्थाओं के साथ इसे सांझा करना होता है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि आधार क्रमांक से किसी तरह का जोखिम पैैदा होता है। इसमें कहा गया कि खबरों में जो दावा किया गया है वह शिकायत निवारण खोज सुविधा से जुड़ा हो सकता है। बयान में कहा गया है यूआईडीएआई इस सुविधा का पूरा लेखा-जोखा रखता है। 

इस मामले में जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई हो रही है। यूआईडीएआई ने कुछ खास व्यक्तियों और राज्य सरकारों को शिकायत निवारण के लिए खोज सुविधा दी है। इसके तहत सीमित अधिकार ही दिए जाते हैं, मसलन ये नाम एवं अन्य सूचनाओं तक सीमित होते हैं और आधार क्रमांक डालकर व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती हैं। सीएससी एसपीपी के मुख्य कार्याधिकारी दिनेश कुमार त्यागी ने कहा कि देश में करीब 300,000 कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) आधार कार्ड पंजीकरण के लिए अधिकृत नहीं थे। सीएससी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना-प्रौद्योगिकी विभाग के तहत गठित एक विशेष इकाई है। उन्होंने बताया कि केवल 27,000 सीएससी ही आधार पंजीयन सेवाएं दे रहे थे, लेकिन केवल सरकारी परिसरों में नामांकन अनिवार्य करने के बाद 10,000 सीएससी स्थानांतरित कर दिए गए। उन्होंने कहा कि शेष 17,000 आधार संबंधी कार्यों में संलग्न नहीं हैं। त्यागी ने कहा कि सीएससी के जरिये केवल अधिकृत ग्राम स्तरीय उद्यमी (वीएलई) आधार के लिए पंजीकरण कर सकते हैं और इसके बाद सभी सूचनाएं यूआईडीएआई केंद्रों में संरक्षित हो जाता है। गौरतलब है कि एक समाचार पत्र में ऐसी खबर छपी थी कि करीब 1 लाख वीएलई यूआईडीएआई सूचनाओं तक पहुंच सकते हैं, जो कुछ रकम लेकर लोगों को आधार सेवाएं मुहैया करा रहे थे। ये ऐसे लोग हैं जिनसे आधार  संबंधी कार्य वापस ले लिए गए थे। यूआईडीएआई ने कहा कि गोपनीय व्यक्तिगत सूचनाएं चोरी नहीं हुई हैं और इनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।

यूआईडीएआई द्वारा जारी ब्यान की अभी स्याही भी नहीं सूखी होगी कि समाचार पत्र ने 'व्हिसल ब्लोअरÓ का नाम, पता तथा उस द्वारा अपनाई तकनीक को सार्वजनिक कर दिया है। आधार की सूचनाओं के सार्वजनिक होने का अर्थ है कि किसी व्यक्ति से जुड़ी निजी सूचनाओं का सार्वजनिक होना। मामला अति गंभीर है, इसे मात्र नकारने से सरकार या विभाग अपना पीछा नहीं छुड़ा सकता, मामले की तह तक जाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार को चाहिए कि किसी एजेंसी से इसकी छानबीन कर तथ्य जनता के सामने लाने चाहिए और दोषी को सजा मिलनी चाहिए।

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