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भारत की नीति

Publish Date: January 08 2018 01:32:02pm

अमरीका द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता राशि रोकने के बाद पाकिस्तान दबाव में आ गया है। एक तरफ पाक सरकार हाफिज सईद के संगठनों पर रोक लगा रही है और उनको जो कोई सहायता देगा, उसे अपराधी समझने की बात कह रही है और दूसरी तरफ कश्मीर सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ करने में पूरी मदद कर रही है। पाकिस्तान की कथनी और करनी का अंतर अब जगजाहिर हो रहा है।
पाकिस्तान की कथनी और करनी के अंतर को समझते हुए अमरीका ने एक बार फिर पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान से निपटने और उसे तालिबान तथा हक्कानी नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए राजी करने के वास्ते सुरक्षा सहायता रोकने के अलावा अमरीका कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। अधिकारी ने बताया, 'निश्चित तौर पर इस खतरे से निपटने के लिए किसी को भी अमरीका के संकल्प पर संदेह नहीं करना चाहिए और मैं कहूंगा कि सभी विकल्प खुले हैं। कुछ नीति निर्माताओं ने व्हाइट हाउस से पाकिस्तान का गैर नाटो सहयोगी का दर्जा हटाने और उस पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूएन जैसे बहुपक्षीय संस्थानों के जरिए दबाव बनाने के लिए कहा है।' बहरहाल, अधिकारी ने इनमें से कोई भी विकल्प अपनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'इस समय मैं विशिष्ट कदमों के बारे में नहीं बता सकता, लेकिन किसी को भी इसमें शक नहीं होना चाहिए कि हम इन खतरों से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। हम सभी विकल्पों पर गौर कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हम पाकिस्तान के साथ सहयोग कर सकते हैं।' इस बीच, रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा कि 'अगर पाकिस्तान आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करता है तो अमरीका रोकी गई सुरक्षा सहायता को बहाल करेगा।'
अमरीका द्वारा अपनाई नीति से स्पष्ट है कि वह दबाव बनाकर चल अवश्य रहा है लेकिन अपने हितों को देखते हुए। वह पाकिस्तान प्रति कभी भी अपनी नीति में बदलाव ला सकता है। इसलिए भारत को केवल और केवल अमरीका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। घाटी में जिस तरह आए दिन आतंकी हमले हो रहे हंै, उनको देखते हुए भारत को अपनी एक स्वतंत्र नीति अपना कर चलने की आवश्यकता है।
पाकिस्तान और चीन दोनों मिल कर भारत के बढ़ते कदमों को रोकने का ही प्रयास कर रहे हैं। पाकिस्तान से भारत बेहतर स्थिति में है और यह बात पाकिस्तान सहित चीन भी जानता है। इसीलिए चीन पाकिस्तान को समर्थन दे भारत को उलझाए रखता है। पाकिस्तान और चीन की बढ़ती नजदीकियों को देखते हुए ही अमरीका भारत के नजदीक आ रहा है लेकिन जिस दिन अमरीका को लगा कि पाकिस्तान की उसे अब आवश्यकता है तो वह भारत को प्यार भरा झटका देने से झिझकेगा नहीं।
पाकिस्तान, चीन दोनों की भारत विरोधी नीति को देखते हुए भारत को अपनी सीमाओं पर सतर्कता और बढ़ानी चाहिए। अपनी सुरक्षा के प्रति और सचेत हो अपनी सेना को हथियारों की दृष्टि से और मजबूत करना चाहिए। वर्तमान स्थिति में भारत को अपने आप को आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सैन्य दृष्टि से भी पहले से कहीं अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। 
भारत को अपने-पुराने मित्र रूस के साथ पहले जैसा भरोसा बनाए रखना चाहिए। विश्व में भारत की एक स्वतंत्र पहचान होनी चाहिए। भारत आज विश्व स्तर पर अपनी पहचान तो बना चुका है। लेकिन उस पहचान को बनाए रखने के लिए भारत को राजनीतिक, आर्थिक व सैनिक दृष्टि से और मजबूत होने की आवश्यकता है।
भारत को कमजोर करने के लिए भारत विरोधी शक्तियां बाहर और भीतर दोनों ओर से दबाव बना रही हैं। भारत को वक्त की नजाकत को समझते हुए ही स्पष्ट नीति बनाकर चलने की आवश्यकता है।



-इरविन खन्ना, मुख्य संंपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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