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प्रवासी भारतीय सांसद सम्मेलन

Publish Date: January 11 2018 01:49:16pm

नई दिल्ली में करीब 24 देशों से आये 134 प्रवासी भारतीय सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा 'भारत किसी के इलाके और संसाधनों पर नजर नहीं रखता। हमारा विकास का मॉडल 'एक हाथ लो और दूसरे हाथ दो' पर आधारित नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत ऐसा देश है जिसने दुनिया के मंचों पर हमेशा रचनात्मक भूमिका निभायी है। प्रधानमंत्री ने दुनियाभर के प्रवासी भारतीय सांसदों से भारत की प्रगति में हिस्सेदार बनने और देश के आर्थिक विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने की अपील की। भारतीय मूल के लोगों को विश्व में भारत का स्थायी राजदूत करार देते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय मूल की एक मिनी विश्व संसद आज मेरे सामने है। मोदी ने कहा, पिछले तीन-चार वर्षों में भारत में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, हमारे प्रति विश्व का नजरिया बदल रहा है। इसका मुख्य कारण यही है कि भारत स्वयं बदल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष देश में रिकार्ड 16 अरब डॉलर का निवेश आया। पीएम नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि मैं दुनिया से आए सभी मित्रों का सवा सौ करोड़ भारतीयों की ओर से स्वागत करता हूं। वेलकम टू इंडिया, वेलकम टू होम। आपकी पुरानी पीढिय़ां देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हुई हैं। आप जब भारत के किसी एयरपोर्ट पर उतरते हैं तो इसी मिट्टी का जुड़ाव सामने आता है। आंखों से भावनाएं सामने आती हैं। आप रोकना चाहते हैं, लेकिन ऐसा कर नहीं पाते। आप भारत से दुनिया के जिस हिस्से में गए वहां अपनी पहचान छोड़ी। भारतीयता को जीवित रखा। साथ ही वहां के खानपान और जीवन में भी घुल गए। आज ये मिनी वल्र्ड पार्लियामेंट मेरे सामने है। देश का गौरव बढ़ाने के लिए आप अभिनंदन के पात्र हैं।'

विदेशों में बसे भारतीयों ने अपने पुरुषार्थ के साथ आर्थिक, राजनीतिक व सामाजिक सभी स्तरों पर उन्नति की है। तकनीक के क्षेत्र में युवा वर्ग भी अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुआ है। कई परिवारों की तो चौथी पीढ़ी विदेश में रह रही है। अपने पूर्वजों का नाम रोशन कर रही है। इतना सब कुछ प्राप्त कर लेने के बावजूद भी यह लोग जड़ों के साथ जुड़े हुए हैं, इसके लिए इन्हें सलाम और बधाई। प्रधानमंत्री ने ठीक कहा है कि विदेशों में यह ही भारत के स्थाई राजदूत हैं और भारत ने कभी दूसरे की जमीन पर नजर नहीं रखी। पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े-बड़े बंगले और ईमारतें जो दिखती हैं उनके मालिक अधिकतर प्रवासी भारतीय हैं। प्रवासी भारतीय शायद विश्व में सबसे अधिक धन अपने देश भारत में भेजने वाले हैं। 

तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि प्रवासी भारतीयों का एक छोटा लेकिन आर्थिक रूप से सम्पन्न वर्ग भारत विरोधी गतिविधियों में भी सक्रिय है। यह वर्ग भारत विरोधी शक्तियों के हाथों खेलते हुए आये दिन ऐसे ब्यान देता या ऐसा कार्य करता दिखाई देता है जिससे भारतीयों की भावना को ठेस पहुंचती है। इस वर्ग का लक्ष्य भारत में तानव पैदा करना ही है।

उत्तर प्रदेश शिया सैन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि देश में मदरसा बोर्डों को समाप्त किया जाए। 11 पृष्ठ के अपने पत्र में रिजवी ने कहा है कि मुसलमानों के बच्चों को कट्टरपंथी मानसिकता से बचाने के लिए मदरसा बोर्डों को समाप्त किया जाना जरूरी है। वसीम रिजवी ने आरोप लगाया कि मदरसों के संचालन के लिए पैसे पाकिस्तान और बंगलादेश से भी आते हैं और आतंकी मदरसों की फंडिंग कर रहे हैं। रिजवी ने एक ट्वीट में कहा है ऐसे स्कूलों को सी.बी.एस.ई. या आई.सी.एस.ई. से संबद्ध किया जाना चाहिए और उनमें गैर-मुस्लिम छात्रों के लिए भी अनुमति होनी चाहिए।

पिछले दिनों इंग्लैंड, अमेरिका और कनाडा के कई गुरुद्वारों की प्रबंधक कमेटियों ने भारत सरकार पर कई तरह के आरोप लगाकर भारतीय अधिकारियों को गुरुद्वारे में आने पर पाबंधी की घोषणा की है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विदेशी धन के सहारे विदेशों में बैठे प्रवासियों का एक छोटा वर्ग भारत विरुद्ध गतिशील है। भारत सरकार को चाहिए कि प्रवासी भारतीय मूल के सांसदों को विश्वास में लेकर विदेशों में जो भारत विरुद्ध प्रचार हो रहा है उसका प्रवासी भारतीयों के माध्यम से जवाब दे।

विश्व में भारत के बढ़ते कदमों और कद को जो शक्तियां बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं वह विदेशों में बैठे प्रवासियों के माध्यम से भारत विरुद्ध भ्रामक प्रचार कर रही हैं। भारत सरकार को प्रवासी भारतीयों के प्रांत स्तर के सम्मेलन कराकर प्रवासियों को धरातल के सत्य से परिचित कराना चाहिए। पाकिस्तान, चीन तो पहले से ही भारत विरुद्ध गतिशील है। अब कुछ विकसित देशों में भी प्रवासी भारतीयों का एक वर्ग भारत विरुद्ध भ्रामक प्रचार कर रहा है। भारत सरकार को विदेशों में हो रही भारत विरोधी गतिविधियों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। प्रवासी सांसदों का सम्मेलन भारत विरुद्ध हो रहे भ्रामक प्रचार की तोड़ बन सकता है। ऐसे सम्मेलन होते रहने चाहिए, विचारों के आदान-प्रदान से स्थिति काफी स्पष्ट होने की संभावना है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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