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भारत की आसियान से व्यापार निवेश बढ़ाने की चाल

Publish Date: January 15 2018 01:39:30pm

इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के सभी 10 देशों के नेता मुख्य अतिथि के तौर पर इसमें हिस्सा लेंगे। ऐसे में भारत एक ऐसे क्षेत्र के साथ अपने व्यापार और सुरक्षा गठजोड़ को बढ़ावा देने पर विचार करेगा जो आर्थिक रूप अहम होने के साथ ही चीन का करीबी भी रहा है। आसियान में करीब 64 करोड़ की आबादी है। यह दुनिया की आबादी का 8.8 फीसदी है जो सम्मिलित यूरोपीय संघ (ईयू) से कहीं अधिक है। वर्ष 2015 में संगठन की कुल सांकेतिक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 2.8 लाख करोड़ डॉलर से अधिक वृद्धि हुई है और अगर आसियान एकल इकाई मान लिया जाए तो इसकी मौजूदा रैकिंग अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस और जर्मनी के बाद दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर की जाएगी। 

इस साल भारत-आसियान की साझेदारी के 25 साल पूरे हो रहे हैं ऐसे में देश, आसियान देशों के नेताओं की इस यात्रा के दौरान व्यापार और राजनीतिक संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर देगा। हालांकि व्यापार और निवेश गठजोड़ संभावित स्तर से काफी कम लेकिन 71 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक रह सकता है। सरकार को उम्मीद है कि 2022 तक यह सुधार के साथ 200 अरब डॉलर के स्तर पर आ जाएगा।  

हालांकि 2018 के अंत तक प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) व्यापार करार का सफल नतीजा निकलने की उम्मीद है। आरसीईपी 10 एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और छह अन्य देशों के बीच एक प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों का समूह शामिल है।

भारत और आसियान देशों ने विभिन्न मसलों पर समान साझेदारी की बात हुई तो कभी गतिरोध जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जिनमें वस्तुओं की दर में कमी, सेवा व्यापार के उदारीकरण जैसा मुद्दा शामिल है। इस संगठन ने हाल ही में भारत पर कार्य प्रगति बाधित करने के लिए दोषी ठहराया। आसियान देशों को उम्मीद थी कि 2017 के अंत तक  समझौते पर बातचीत पूरी हो जाएगी क्योंकि इस साल संगठन का 50वां स्थापना वर्ष भी था।  लेकिन भारत और विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों मसलन दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच कृषि व्यापार और आप्रवासन जैसे मुद्दों पर बढ़ती कड़वाहट के बीच ऐसा नहीं हो पाया।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरसीईपी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी लेकिन वाणिज्य मंत्रालय का ऐसा मानना है कि व्यापार से जुड़ी बातचीत आधिकारिक वार्ता पर छोड़ दिया जाना चाहिए जो अगले महीने शुरू होने वाली है।  संगठन के भीतर और छोटे देशों मसलन कंबोडिया और लाओस से लेकर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं मसलन मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ भी विभिन्न व्यापार समझौते को लेकर गतिरोध है जिनके साथ कारोबार की अलग-अलग परिस्थितियां हैं।

दिल्ली के एक व्यापार विशेषज्ञ का कहना है, 'भारत और चीन ने पहले अलग-अलग राष्ट्रों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की थी और प्रभावी तरीके से समूह को तोडऩे की कोशिश की थी।Ó अभी सदस्य देशों को कई मुद्दों पर सहमति बनानी बाकी है लेकिन साझेदार राष्ट्रों ने पिछले साल यह घोषणा की थी कि आरसीईपी को 2018 तक पूरा किया जाएगा।  आसियान भारत का चौथा बड़ा कारोबारी भागीदार है और यह इसके कुल कारोबार का 10.2 प्रतिशत हिस्सा है। भारत आसियान का सातवां बड़ा कारोबारी सहयोगी है।
लेखक शुभायन चक्रवर्ती
 

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