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सरकारी धन से धार्मिक यात्राएं

Publish Date: January 21 2018 01:44:31pm

2012 में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को मुस्लिम समाज को हज पर जाने के लिए मिलने वाली सब्सिडी को आगामी दस वर्षों में समाप्त करने के आदेश दिए थे। अतीत में सत्ता में रही कांग्रेस ने उपरोक्त निर्णय पर अमल करते हुए सब्सिडी में दी जाने वाली धन राशि को धीरे-धीरे कम करना शुरू किया था। कांग्रेस की मुस्लिम वोट बैंक पर नजर थी, लेकिन मोदी सरकार ने एक ही झटके में हज यात्रा पर दी जाने वाली सब्सिडी को बंद करने की घोषणा कर दी। देश में सरकार के उपरोक्त निर्णय को ले काफी चर्चा हो रही है।
प्रश्न यह है कि क्या एक धर्म निरपेक्ष देश में धार्मिक यात्राओं के लिए सरकारी सहायता मिलनी चाहिए? उत्तर सीधा सा है कि नहीं। हज यात्रा के लिए आर्थिक सहायता तो इस्लामिक देशों में भी नहीं मिलती, लेकिन देश में तुष्टिकरण की राजनीति के परिणामस्वरूप हज यात्रियों को आर्थिक सहायता दी जाती रही।
हज यात्रियों को मिल रही आर्थिक सहायता को देखते हुए अन्य धर्मों के लोगों ने भी धार्मिक यात्राओं के लिए सरकारी सहायता की मांग की। धार्मिक संगठनों के दबाव में आकर देश में विभिन्न प्रकार की धार्मिक यात्राओं के लिए आर्थिक सहायता देने का सिलसिला शुरू हो गया। अब प्रश्न यह है कि जब हज यात्रा के लिए सरकारी आर्थिक सहायता बंद हो गई है तो अन्य धर्मों के लोगों को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए कि नहीं?
गौरतलब है कि विभिन्न प्रदेशों की सरकारों ने अपने स्तर पर धार्मिक यात्राओं को आर्थिक मदद देनी शुरू की हुई है। मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना शुरू की हुई है, इस योजना के तहत करीब एक लाख लोग लाभ रहे हैं। इसके तहत रेलगाड़ी द्वारा बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्ननाथ पुरी, द्वारका, वैष्णो देवी, हरिद्वार इत्यादि की यात्रा कराई जाती है। ननकाना साहिब और मानसरोवर की यात्राएं भी शामिल हैं। इस योजना का लाभ एक व्यक्ति एक बार ही ले सकता है। दिल्ली सरकार ने भी हाल ही में मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा शुरू की है जिसका वरिष्ठ नागरिक लाभ उठा सकते हैं। यह यात्री बस द्वारा मथुरा, वृन्दावन, हरिद्वार, आगरा, ऋषिकेश, अजमेर, पुष्कर इत्यादि तीर्थ स्थलों में जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत मानसरोवर यात्रा के लिए सब्सिडी की राशि दोगुनी कर दी है। सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए श्रवण यात्रा भी चलाई जाती है। इसी तरह उत्तराखंड सरकार द्वारा हिन्दू और मुस्लिम दोनों के लिए धार्मिक यात्राओं का आयोजन किया जाता है। इसके अन्तर्गत प्रति यात्री को 25000 से 30000 रुपए आर्थिक सहायता मिलती है।
उपरोक्त यात्राओं के साथ-साथ हिमाचल, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, उड़ीसा और असम में भी धार्मिक यात्राओं के लिए यात्रियों को सरकारों द्वारा आर्थिक सहायता दी जा रही है। पंजाब में पिछली अकाली-भाजपा सरकार भी धार्मिक यात्राओं का आयोजन करती थी लेकिन कै. अमरेन्द्र सरकार ने सब्सिडी देनी समाप्त कर दी है।
बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना और केरल प्रदेश की सरकारें न तो धार्मिक यात्राओं की आयोजक हैं और न ही कोई आर्थिक सहायता देती हैं। एक धर्म-निरपेक्ष देश में लोगों द्वारा कर के रूप में दी गई राशि को धार्मिक यात्राओं के नाम पर खर्च करना उचित नहीं कहा जा सकता। केन्द्र सरकार ने आजादी के बाद ही तुष्टिकरण की राह पर चलते हुए हज यात्रियों को आर्थिक सहायता देने की जो शुरुआत की उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप प्रदेश स्तर की सरकारों ने भी राजनीतिक लाभ को सम्मुख रख कर धार्मिक यात्रियों को सब्सिडी देने का सिलसिला शुरू कर दिया।
अब केंद्र सरकार ने हज सब्सिडी समाप्त कर दी है तो समय की मांग है कि प्रदेश स्तर पर आयोजित हो रही धार्मिक यात्राओं में दी जाने वाली सब्सिडी भी बंद हो जानी चाहिए। एक धर्म-निरपेक्ष देश में धर्म के नाम पर हो रही राजनीति के पर काटने  के लिए भी सरकारों को आर्थिक सहायता बंद कर देनी चाहिए। धार्मिक संगठनों व संबंधित समाज को भी देशहित को सम्मुख रख आर्थिक सहायता लेने से इंकार कर देना चाहिए। यात्राओं पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता को देश के विकास में लगा देना चाहिए इसी में देश तथा देशवासियों का भला है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक
, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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