Tuesday, May 22,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राजनीति

राष्ट्रपति का आह्वान

Publish Date: January 28 2018 01:52:34pm

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 69वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश को विकास की नई उचाईंयों पर ले जाने के लिए गरीबी के अभिशाप को जल्दी से जल्दी मिटाने, समाज में भेदभाव दूर करने और सम्पन्न लोगों से वंचितों के हक में सब्सिडी जैसी सुविधाओं को त्यागने का आह्वान किया। इसके साथ ही सभी नागरिकों के बीच बराबरी, समाज में भाईचारे को मजबूत करने तथा विभिन्न संस्थाओं को सिद्धांतों तथा मूल्यों के आधार पर चलाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी के लिए उत्तम शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, लड़़कियों को हर क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने तथा अंधविश्वास एवं असमानता को दूर करने के लिए हरसंभव उपायों की जरूरत बताई। कोविंद ने देश की आजादी और गणतंत्र के निर्माण में लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि देश को संवारने और समाज की विसंगतियों को दूर करने के लिए जिस तरह से उस समय प्रयास किये गये थे, आज फिर वैसे ही प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमने बहुत कुछ हासिल किया है, परन्तु अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। हमारे लोकतंत्र का निर्माण करने वाली पीढ़ी ने जिस भावना के साथ काम किया था, आज फिर उसी भावना के साथ काम करने की जरूरत है। कोविंद ने कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना सभी का सपना है। एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए सभी को प्रयास करने हैं और ऐसा भारत बनाना है जो अपनी योग्यता के अनुरूप 21वीं सदी में विकास की नयी ऊंचाइयों पर खड़ा होगा और जहां पर नागरिक अपनी क्षमता का भरपूर उपयोग कर सकेगा। गरीबी के अभिशाप को कम से कम समय में जड़ से मिटाने पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज भी बहुत से देशवासी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। वे गरीबी में किसी तरह अपनी जिन्दगी गुजार रहे हैं। उन सभी को सम्मान देते हुए उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और विकास के अवसर निरंतन प्रदान करना भारतीय लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है और उसकी सफलता की कसौटी भी। कोविंद ने कहा कि गरीबी को समाप्त करने, सभी के लिए उत्तम शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा बेटियों को हर क्षेत्र में समान अवसर दिलाने के लिए सरकार वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसे आधुनिक भारत की रचना करनी है, जो प्रतिभावान लोगों का और उनकी प्रतिभा के उपयोग के लिए असीम अवसरों वाला देश हो। कोविंद ने खुशहाल राष्ट्र के निर्माण के लिए देशवासियों से बेटियों की आवाज सुनने और बच्चों को कुपोषण से बचाने एवं शिक्षा के माध्यम से उनकी जिन्दगी संवारने का आह्वान करते हुए कहा, जहां बेटियों को बेटों की ही तरह शिक्षा, स्वास्थ्य और आगे बढऩे की सुविधाएं दी जाती हैं, ऐसे समान अवसरों वाले परिवार और समाज ही एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण करते है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सरकार कानून लागू कर सकती है और नीतियां भी बना सकती हैं, लेकिन ऐसे कानून और नीतियां तभी कारगर होंगे जब परिवार और समाज बेटियों की आवाज सुनेंगे। उन्होंने कहा कि हमें परिवर्तन की इस पुकार को सुनना ही होगा। भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर जोर देते हुए कोविंद ने कहा, किसी दूसरे नागरिक की गरिमा और निजी भावना का उपहास किये बिना, किसी के नजरिये से या इतिहास की किसी घटना के बारे में भी हम असहमत हो सकते हैं। ऐसे उदारतापूर्ण व्यवहार को ही भाईचारा कहते हैं। राष्ट्र के रूप में भारत की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति और प्रथम गणतंत्र दिवस के बीच का दौर लगन, संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ देश को संवारने और समाज की विसंगतियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयासों का दौर था। उन्होंने किसानों का जीवन बेहतर बनाने के लिए और अधिक प्रयास किये जाने की आवश्यकता जतायी तथा सशस्त्र सेनाओं, पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों के जवानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप साधन एवं उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए कहा कि देश के सामरिक निर्माण क्षेत्र को निरंतर आधुनिक और मजबूत बनाये रखना होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2020 में हमारे गणतंत्र को 70 वर्ष हो जायेंगे। वर्ष 2022 में हम अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। निकट भविष्य में आने वाले ये बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर हैं। स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान के निर्माताओं द्वारा दिखाए रास्तों पर चलते हुए हमें एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए प्रयास करना है।

राष्ट्रपति कोविंद ने देश के आम जन को सम्मुख रखते हुए ही उन तमाम मुद्दों को अपने संबोधन में छुआ है, जिनको हल किये बिना भारत को विकास की नई उंचाइयां छूना मुश्किल होगा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आसियान देशों के प्रमुखों का बतौर मेहमान बनकर आना भारत के लिए जहां गर्व की बात है वहीं यह घटना भारत के विश्व स्तर पर बढ़ते कदमों को भी दर्शाता है। पाकिस्तान, चीन भारत के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए भारत विरुद्ध कुछ न कुछ करते रहते हैं। उपरोक्त दोनों देशों द्वारा किये जा रहे विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व स्तर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हो रहा है।

भारत की स्थाई सफलता इसी बात पर निर्भर होगी की भारत का आम जन कितना खुशहाल व जागरुक है। भारत ने जिस संविधान के अन्तर्गत जिस व्यवस्था को अपनाया था उसके परिणाम हमारे सामने आने लगे हैं। भारत ने पिछले सात दशकों में काफी विकास किया है, लेकिन विकास की नई ऊंचाइयों को छूने और एक विकसित देश के रूप में अगर भारत को अपनी पहचान बनानी है तो भारत को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिए आह्वान को गंभीरता से लेना होगा।
 


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक
, दैनिक उत्तम हिन्दू।

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 9814266688 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें ।


साइना नेहवाल ने पूरा किया खेल मंत्री राठौड़ का चैलेंज, देखें वीडियो

नई दिल्ली (उत्तम हिंदू न्यूज) : फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए ...

जीवन के हर रिश्ते को महत्व देती हैं करीना कपूर

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज) : अभिनेत्री करीना कपूर खान का कहना...

top