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मोदी का पलटवार

Publish Date: February 09 2018 07:05:52pm

संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पलटवार कर कांग्रेस को एक प्रकार से कटघरे में खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि कांग्रेस सहित विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'न्यू इंडिया' के प्रश्न पर घेरने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्षी दलों विशेषतया कांग्रेस पर जिस तरह पलटवार किया उसका शायद ही किसी को अंदाजा होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर वार करते हुए कहा कि 'किस पुराने भारत की मांग कर रही है? आपातकाल वाले भारत की, घोटाले वाले की या फिर उस दंगे वाले भारत की जिसमें हजारों सिख भाई मारे गए थे, बताते चलें कि राज्यसभा में कांग्रेस ने कहा था कि हमें नया भारत नहीं चाहिए। पुराना भारत लौटा दो। पलटवार करते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस कभी स्वार्थ से उठकर बड़ी सोच के साथ कदम नहीं उठा पाई। इसी वजह से देश पीछे रह गया। पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में अधिकतर सवालों का जवाब देते हुए मोदी इतिहास की याद दिलाते रहे। मोदी ने कांग्रेस के पूरे काल को परिवारवाद के आसपास घिरे लोकतंत्र में समेट दिया। राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने पर व्यंग्य करते हुए कहा, कभी किसी ने सुना कि हुमांयू के बाद अकबर को चुनकर आना पड़ा था? कांग्रेस नेता जयराम रमेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने ही कहा है कि सल्तनत चली गई, लेकिन सुल्तान की तरह व्यवहार नहीं भूले। उन्होंने कश्मीर मुद्दे से लेकर देश की तमाम बड़ी समस्याओं के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, बैंकों के एनपीए को कांग्रेस का पाप करार दिया। भाषण में जवाहर लाल नेहरू, राजीव गांधी और राहुल गांधी पर निशाना साधा। राजनीतिक स्वार्थ के लिए कांग्रेस पर देश के टुकड़े करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने जो जहर बोया उसका खामियाजा देश आज तक भुगत रहा है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के गांधी वाला पुराना भारत लौटाने के बयान पर मोदी ने कहा कि हमें भी गांधी वाला ही भारत चाहिए, जिसमें राष्ट्रपिता ने कांग्रेस मुक्त भारत की बात कही थी। उन्होंने कहा, कांग्रेस मुक्त भारत का विचार मेरा नहीं, बल्कि गांधी जी का था। राष्ट्रपिता का यह मानना था कि आजादी के बाद कांग्रेस की कोई जरूरत नहीं है और उसे भंग कर देना चाहिए। मोदी ने कहा कि कांग्रेस को सेना के जीप घोटाले वाला, पनडुब्बी घोटाले वाला, एमरजेंसी वाला, बोफोर्स घोटाले वाला भारत चाहिए। इस पार्टी को भारत चाहिए जिसमें बड़ा पेड़ गिरने पर हजारों निर्दोष सिखों की हत्या हुई थी। उसे न्यू इंडिया नहीं चाहिए। मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा एक ही परिवार का गुणगान करती आयी है। सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का पहला प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया गया, जबकि कांग्रेस की 15 में से 13 कमेटी उनके उनके पक्ष में थी। देश के पहले प्रधानमंत्री सरदार पटेल होते तो मेरे कश्मीर का हिस्सा पाकिस्तान के पास नहीं होता। पूरा कश्मीर हमारा होता। मोदी ने देश में लोकतंत्र स्थापित करने के कांग्रेस के दावे को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा, कांग्रेस को यह अहंकार है कि देश को लोकतंत्र प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहल लाल नेहरू और उसने दिया है, जबकि भारत में लोकतंत्र हजारों साल से है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने मंगलवार को बशीर बद्र की शायरी पढ़ते हुए कहा था, दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे जब कभी दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा नहीं हों। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, खडगे साहेब बशीर बद्र की शायरी की शुरुआत की दो लाइन पढ़ लेते तो बेहतर होता। उन दो लाइनों में बशीर ने कहा था कि जी चाहता है सच बोलें-क्या करें हौसला नहीं होता। मोदी ने डोकलाम के वक्त राहुल गांधी के चीनी राजदूत से मिलने का भी हवाला दिया और कहा कि क्या यह भारतीय सैनिकों के मनोबल के लिए अच्छा था? या फिर सर्जिकल स्ट्राइक पर ओछी राजनीति देश के लिए फायदेमंद थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यही छोटी सोच कांग्रेस की वर्तमान दशा के लिए जिम्मेदार है और अगर इसमें बदलाव नहीं आया तो यहीं गुजारा भी करना होगा। कांग्रेस की योजनाओं का नाम बदलकर चलाने के आरोप का जवाब देते हुए पीएम ने कहा कि वह सियासी सोच के साथ शासन नहीं करते। आधार व जीएसटी की शुरुआत भी कांग्रेस के काल में हुई थी। लेकिन सोच बड़ी नहीं थी। राजग ने उसे सही गति दी। हम गेम चेंजर्स हैं। नेम चेंजर्स नहीं। कांग्रेस देश हित से जुड़े मुद्दे पर भी राजनीति से बाज नहीं आ रही है।'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस को वो आईना दिखाया है जिसको वह कभी देखने को तैयार नहीं थी। नेहरू और पटेल के दृष्टिकोण में अंतर था। प्रधानमंत्री मोदी ठीक कह रहे हैं कि अगर सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर सहित भारत की राजनीतिक सोच आज से भिन्न होती।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार ने देश की दिशा और दृष्टि में परिवर्तन लाने का जो प्रयास किया है उसी कारण जहां विश्व की भारत के प्रति सोच बदली है वहीं मोदी सरकार द्वारा अपनाई नीतियों के कारण भारत विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहा है। भारत की सफलता का श्रेय मोदी सरकार को जाता देखकर कांग्रेस सहित वह सभी राजनीतिक दल जो धर्मनिरपेक्षता के नाम पर तुष्टिकरण की राजनीति खेल रहे थे वे निराश दिखाई दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान की उस मूल भावना को सम्मुख रखते हुए कार्य करना शुरू किया है जिसको कांग्रेस  'वोट बैंकÓ की राजनीति के कारण अनदेखा कर रही थी। लोकतंत्र में विपक्ष एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है लेकिन जब विपक्ष संकीर्णता के दायरे में रहते हुए केवल आलोचना के लिए आलोचना करता है तो उसके हाथ हताषा के सिवा कुछ नहीं लगता। कांग्रेस सहित विपक्षी दल आज हताषा के दौर से गुजर रहे हैं और इसी कारण वह देश में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन को देख नहीं पा रहे। विपक्षी दलों और विशेषतया कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में आईना दिखा सत्य का सामना कराया है। कांग्रेस अभी भी अगर नकारात्मक राजनीति जारी रखती है तो नुकसान उसी का ही होगा।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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