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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Publish Date: February 14 2018 12:25:42pm

हैदराबाद में हुए सम्मेलन में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मस्जिद हटाने का सुझाव देने वाले मौलाना सैयद सलमान हुसैन नदवी को बोर्ड से निकाल दिया। बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद अनंत काल तक मस्जिद ही रहेगी। इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसे फिर से बनाने की कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। हैदराबाद में खत्म 26वें पूर्ण सम्मेलन के बाद बोर्ड के सदस्य कासिम रसूल इलियास ने नदवी को कार्यकारिणी से बर्खास्त किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बोर्ड बाबरी मामले में अपने पुराने रुख पर कायम है कि मस्जिद को न तो शिफ्ट किया जा सकता है और न ही जमीन को गिफ्ट या बेचा जा सकता है। नदवी बोर्ड के फैसले के खिलाफ बोल रहे हैं, इसलिए उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। नदवी ने कुछ दिन पहले ही आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के साथ बंगलूरू में बैठक के बाद कहा था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवादित स्थल से 200 किलोमीटर दूर भी बने तो कोई दिक्कत नहीं है। इस्लाम मस्जिद को शिफ्ट करने की इजाजत देता है। बोर्ड ने एक साथ तीन तलाक पर केंद्र के बिल को महिला विरोधी करार दिया और कहा, इससे महिलाओं की मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाएंगी। यह संविधान और शरिया खिलाफ भी है। बोर्ड इस बिल को राज्यसभा से पास होने से रोकने के लिए कोशिशें करता रहेगा। साथ ही बिल के खिलाफ समुदाय के बीच जागरूकता अभियान भी चलाएगा। मौलाना सलमान हुसैन नदवी ने अपनी बर्खास्तगी पर कहा, बोर्ड में तानाशाही चल रही है। पहले नोटिस तक नहीं दिया गया। उन्होंने खुद को पहले ही बोर्ड से अलग कर लिया था। बोर्ड का गठन जिस मकसद से किया गया था, वह पूरा होता नहीं दिख रहा है, इसलिए इसे तत्काल भंग कर देना चाहिए। इसकी जगह शरीयत एप्लीकेशन बोर्ड बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका रास्ता अमन का है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद केंद्र की सत्ता संभालने वाले लोगों ने अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति तो अपनाई ही साथ ही तुष्टिकरण की राह पर भी चल पड़े और उसका परिणाम यह हुआ कि देश के बहुमत समाज की भावनाओं की अनदेखी होने लगी और अल्पमत समुदायों को आवश्यकता से अधिक महत्व मिलने लगा। दशकों से चली राजनीति का परिणाम देश के सामने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर एक भव्य मंदिर के निर्माण को लेकर अपनाई नीति के रूप में सामने आया है।

समय की मांग तो यह थी कि देश के बहुमत हिन्दू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह विवाद खड़ा ही न करता और यह जमीन भव्य मंदिर निर्माण के लिए दे दी जाती, लेकिन हुआ इसके ठीक उल्ट। बोर्ड के जिस सदस्य मौलाना सलमान हुसैन नदवी ने मस्जिद कहीं और बनाने का सुझाव दिया उसे ही बोर्ड से बाहर कर दिया गया। बोर्ड के उपरोक्त फैसले से बोर्ड की नकारात्मक सोच व अंहकार की भावना का पता चलता है।

विश्व के किसी भी भाग में चले जाएं आप पायेंगे कि देश के बहुमत समाज की भावनाओं को ही प्राथमिकता दी जाती है। अल्पमत समुदायों को बुनियादी अधिकारों के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का भी अधिकार होता है। केवल इस्लामिक राज्यों में ही अल्पमत समुदाय की स्थिति दयनीय है। भारत ही एक ऐसा देश है जहां बहुमत की जगह अल्पमत समुदाय राजनीति को प्रभावित भी कर रहा है और बहुमत समुदाय पर दबाव बनाकर चलता है। तुष्टिकरण की नीति के कारण ही वर्तमान स्थिति उत्पन्न हुई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की यह टकराव वाली तथा नकारात्मक सोच वाली नीति का अंत में बोर्ड व मुस्लिम समाज को ही नुकसान होगा। भगवान राम केवल हिन्दुओं के ही नहीं बल्कि देश की संस्कृति के केन्द्र बिन्दू हैं। उनके प्रति नकारात्मक सोच लेकर चलना बोर्ड का आत्मघाती कदम ही कहा जा सकता है।


                                                             
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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