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कटघरे में हुड्डा

Publish Date: March 15 2018 01:31:03pm

हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें और बढऩे वाली हैं। प्रदेश की मनोहर लाल सरकार हुड्डा के खिलाफ भूमि अधिग्रहण के दो और मामलों की जांच भी सीबीआई से कराएगी। हुड्डा पहले से तीन मामलों में सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान रोहतक के उदार गगन मामले व सोनीपत के तीन गांवों के भूमि अधिग्रहण की जांच भी सीबीआई को सौंपने का खुलासा किया हैं। सीएम ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने सदन में छाती ठोककर कहा था कि एक भी इंच जमीन का गलत अधिग्रहण उन्होंने नहीं किया। हुड्डा अब हिम्मत रखें और यह न कहें कि राजनीतिक द्वेष के चलते ऐसा हुआ है। मनोहर लाल ने पूर्व सीएम हुड्डा पर तंज कसते हुए कहा कि 'ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे कांग्रेस ने ठगा नहींÓ और तो और रोहतक वालों को भी नहीं छोड़ा।
गौरतलब है कि गत दिनों देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी हुड्डा सरकार के गुरुग्राम में 688 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को रद्द करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने इसे सरकारी मशीनरी और निजी बिल्डरों की नापाक सांठगांठ करार दिया। जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने 24 अगस्त, 2007 और 29 जनवरी 2010 के फैसले रद्द करते हुए कहा कि ये फैसले शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हुए लिए गये थे। अदालत ने कहा कि इस मामले में सबसे ज्यादा सार्वजनिक हितों का अहित हुआ है। बेंच ने यह जमीन हुडा/एचएसआईडीसी के कब्जे में दे दी है। अदालत ने बिचौलियों तक बड़ी रकम पहुंचने का जिक्र करते हुए सीबीआई को जांच का आदेश दिया। अदालत ने कहा, यह पैसा सिर्फ राज्य का था, किसी और का नहीं। हम राज्य की एजेंसियों और केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि हर लेन-देन की गहराई तक जांच हो और पाई-पाई वसूल कर राज्य सरकार तक पहुंचाई जाए। जमीन सौदों की जांच के लिए गठित जस्टिस ढींगरा आयोग को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 2 महीने में फैसला लिया जाए।
उल्लेखनीय है कि मानेसर, नखडौला व नौरंगपुर गांव में 600 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया 2004 में चौटाला सरकार के समय में शुरू हुई थी। कानून की दृष्टि से यह प्रक्रिया नियमानुसार थी लेकिन विधानसभा चुनावों के बाद हुड्डा सरकार सत्ता में आ गई। प्रकाशित रिपोर्ट अनुसार अक्तूबर 2004 में सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस के कार्यकाल का यह पहला जमीन अधिग्रहण था। सेक्शन 6 का नोटिस जारी करने से पहले भूमि अधिग्रहण कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर 224 एकड़ जमीन को अधिग्रहण मुक्त करते हुए 688 एकड़ जमीन का अधिग्रहण 25 अगस्त 2005 में प्रस्तावित हुआ। जो जमीन अधिग्रहण के दायरे से मुक्त की गई थी वास्तव में उसे पहले से लाइसेंस मिला हुआ था। तथाकथित प्रापर्टी डीलर्स ने किसानों को अधिग्रहण का भय दिखाते हुए उनकी जमीन अधिग्रहण के तय रेट से अधिक देने का लालच देकर जमीन का एग्रीमेंट शुरू कर दिया। सरकार ने इस बीच किसानों व भूमि मालिकों से दावे व आपत्तियां मांगी। सेक्शन छह से 9 के बीच की अवधि में प्रापर्टी डीलर्स ने किसानों की जमीन 80 लाख रुपए एकड़ तक में खरीदी। इस बीच जमीन के 688 एकड़़ में से अधिकांश हिस्सा बिल्डर्स ने खरीद लिया। 9 मार्च 2006 को सरकार ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शेष सेक्शन के तहत दूसरे नोटिस जारी कर दिए तथा मुआवजा घोषित होने की तारीख 26 अगस्त 2007 तय कर दी। लेकिन जिस दिन किसान मुआवजा सुनने की आस लेकर भूमि अधिग्रहण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि जमीन का अधिग्रहण ही रद्द कर दिया गया है। जमीन अधिग्रहण में भ्रष्टाचार की बू आई तो मानेसर के किसान ओम प्रकाश यादव ने पूरे मामले की शिकायत की लेकिन सरकार द्वारा कोई सुनवाई नहीं की गई। यादव कहते हैं कि अफसरों ने सरकार के इशारे पर पूरे खेल को अंजाम दिया, क्योंकि जिस जमीन का अधिग्रहण किया जाता है उसके राजस्व रिकार्ड के आधार पर उसकी रजिस्ट्री नहीं की जा सकती।
भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सरकार के समय में ही भूमि घोटालों को लेकर विवाद उठते रहे हैं। हुड्डा को तत्कालीन राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का संरक्षण व समर्थन प्राप्त था, इसलिए हरियाणा में पार्टी के भीतर हुड्डा को चुनौती देने वालों और उन पर लगे आरोपों की तरफ कांग्रेस हाईकमान ने कोई ध्यान नहीं दिया।
सोनिया गांधी के दामाद वाड्रा को भूमि के सौदे को ले रियायतें देने के आरोप भी हुड्डा सरकार पर लगते रहे हैं। अब देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व खट्टर सरकार द्वारा लिए निर्णय से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा कटघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं। हालात व तथ्य बता रहे हैं कि हुड्डा की मुश्किलें आने वाले समय में और बढऩे वाली हैं।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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