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राजनीति

उपचुनाव परिणामों का संदेश

Publish Date: March 16 2018 01:08:55pm

गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में मिली हार पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हार की वजह अति आत्मविश्वास रहा है। इसी तरह अभिनेता से बने नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने भी कहा कि हार का मुख्य कारण अहंकार और अति आत्मविश्वास ही है। गोरखपुर से जहां स्वयं योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार चुनाव जीते हैं, उसमें हार जाना योगी आदित्यनाथ व भाजपा के लिए एक बड़ा झटका ही कहा जा सकता है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तो फूलपुर से 2014 में भाजपा का झंडा लहराने में सफल हुए थे लेकिन उपचुनाव में भाजपा को फिर हार का मुंह देखना पड़ा। 
बिहार में भी राजद द्वारा लोकसभा उपचुनाव के साथ विधानसभा उपचुनाव में मिली सफलता नीतीश और भाजपा दोनों के लिए बड़ा झटका है। राजद का अकेले अपने दम पर जीतना दर्शाता है कि प्रदेश में नीतीश कुमार का भाजपा के साथ हुए गठबंधन को आम जनता ने स्वीकार नहीं किया।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और अब उत्तर प्रदेश तथा बिहार के लोकसभा उपचुनावों में मिली हार के कारण भाजपा के उस वर्ग को बड़ा झटका लगा होगा जो नायकवाद में विश्वास रखते हुए भाजपा के आम कार्यकर्ता के प्रति उदासीन होता चला जा रहा था। उपरोक्त उपचुनावों के परिणामों को लेकर भाजपा विरोधी दल जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राजनीतिक तीर छोड़ रहे हैं वह व्यवहारिक स्तर पर भूल कर रहे हैं।
उपरोक्त उपचुनावों के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और संबंधित प्रदेशों के भाजपा के क्षेत्रीय नेता ही दोषी माने जाएंगे चाहे वह योगी आदित्यनाथ हो या बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ही क्यों न हों? 2019 में लोकसभा चुनावों में चुनावी नतीजे क्या होंगे उनका वर्तमान में आये उपचुनाव परिणामों के आधार पर आज कुछ कहना उचित नहीं होगा। लोकसभा चुनावों में भाजपा की तरफ से तो नरेन्द्र मोदी ही केंद्र बिन्दू रहेंगे। लेकिन विपक्ष की तरफ से कौन केंद्र बिन्दू रहेगा उस बारे आज कहना संभव नहीं है। हां बसपा, सपा और कुछ अन्य क्षेत्रीय दल अगर कांग्रेस सहित और बिना कांग्रेस के भी एकजुट हो जाते हैं तो भाजपा के लिए 2019 लोकसभा चुनावों की राह में एक नहीं अनेक परेशानियां राह रोके खड़ी दिखाई देंगी।
अखिलेश, ममता, उमर अब्दुल्ला, मायावती, राहुल गांधी में से कौन केंद्र बिन्दु बनकर क्या भूमिका निभायेगा इस बारे अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस बेशक एक राष्ट्रीय दल है लेकिन आज उसका आधार कम•ाोर होता जा रहा है। इसलिए राहुल गांधी के नेतृत्व में अन्य दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेंगे इस बारे आज कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन अगर हिन्दी क्षेत्र के प्रदेशों में बसपा, सपा और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरती हैं तब भी भाजपा अतीत में मिली सीटों के बराबर शायद ही जीत पाये।
राजनीति में कब, कौन, किसको मात दे जाए इसका कुछ पता नहीं। उत्तर प्रदेश और बिहार के आये उपचुनाव परिणामों ने कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के सम्मुख भी कई प्रकार के प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश के चुनाव परिणामों से कांग्रेस को जो मानसिक मजबूती मिली थी वह उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनाव परिणामों को देखकर कहा जा सकता है कि कमजोर हुई है। कांग्रेस को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में कोई बड़ी सफलता मिलने वाली है ऐसा कोई संकेत भी उपचुनाव परिणाम नहीं दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनाव परिणामों ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि उपरोक्त प्रदेशों और देश की राजनीति को दलित, पिछड़े और मुस्लिम वर्ग एकजुट होकर एक बड़ा राजनीतिक फेरबदल करने की क्षमता रखते हैं। दूसरी बात यह भी स्पष्ट है कि देश में जाति व समुदाय आधारित राजनीति की जड़ें काफी गहराई तक जा चुकी हैं। जात-पात का विरोध केवल मंचों तक तथा कानून की नजर तक ही सीमित है। धरातल स्तर पर तो आज भी जाति आधारित राजनीति ही हो रही है।
सपा और बसपा का गठबंधन और उसकी चुनावी जीत यही दर्शा रही है कि प्रदेश व देश हित के साथ-साथ जाति हित भी मतदान के समय एक बड़ी भूमिका निभाता है। भाजपा को उपचुनाव परिणामों से सबक लेते हुए जहां अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा वहीं शक्ति का विकेंद्रीकरण करने की भी आवश्यकता है। केवल मोदी और शाह की जोड़ी के सहारे अगर पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव भी 2014 की तरह लडऩा चाहेगी तो भाजपा के नीतिकार बड़ी भूल करेंगे। भाजपा को आने वाले एक वर्ष में जनता से सम्पर्क बढ़ाना होगा और यह कार्य केवल कार्यकर्ता ही कर सकता है। कार्यकर्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी कही बात को कितनी गंभीरता से हाईकमान में सुना जाता है। आज भाजपा का कार्यकर्ता उदासीन है क्योंकि उसकी कही बात को हाईकमान सुनकर अनसुनी कर रहा है।
धरातल से जुड़े आदमी की बात के प्रति उदासीनता का अर्थ धरातल से कटना ही है। उत्तर प्रदेश और बिहार तथा इससे पहले मध्य प्रदेश और राजस्थान के उपचुनाव परिणाम यही संदेश दे रहे हैं कि भाजपा को धरातल स्तर पर कुछ ठोस करने की आवश्यकता है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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