Wednesday, July 18,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राजनीति

खिलेंगे फूल उस जगह पे तू जहां शहीद हो

Publish Date: March 23 2018 12:21:37pm

यह देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक ऐतिहासिक मोड़ देने वाली घटना है, एक शहीद के खून से अनेक शहीद पैदा होते हैं, इसका स्वत: सिद्ध प्रमाण है। 30 अक्टूबर 1928 को इंग्लैंड के प्रसिद्ध वकील सर जान साइमन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय एक आयोग लाहौर आया, उसके सभी सदस्य अंग्रेज थे, इसलिए पूरे भारत में भी इस कमीशन का विरोध हो रहा था, लाहौर में भी वैसा ही निर्णय हुआ। केवल काले झंडे और सुनाई देता था
गगनभेजी गर्जन- साइमन कमीशन गो बैक, इंकलाब जिंदाबाद और नौजवान गा रहे थे यह गीत हिंदुस्तानी हैं हम- हिंदुस्तान हमारा, मुड़ जाओ, जाओ साइमन, यहां कुछ नहीं तुम्हारा।
वैसे आंदोलनकारी निहत्थे थे, यद्यपि मजबूत इरादे से ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रहे थे। पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के नेतृतव में आबाल, वृद्ध, नर-नारी नारे लगाते स्टेशन की ओर बढ़ते ही जा रहे थे। पुलिस की धमकी पूर्ण चेतावनी का वहां कोई असर नहीं था, फिरंगियों की निगाह में यह देशभक्तों का गुनाह था। खूब लाठियां बरसीं, हड्डियां टूटीं, सैकड़ों लोग घायल हुए, राष्ट्र भक्तों के रक्त से भारत मां का अभिषेक हुआ। इस पर भी जनसमूह को न रुकते देख पुलिस कप्तान स्कॉट ने अपने हाथ के डंडे से निर्दयतापूर्वक लालाजी की पिटाई की, उसके सहायक सांडर्स ने अपने एसपी का खूब साथ निभाया। क्रांतिकारी भगत सिंह और उनके साथियों ने यह सब कू्ररता अपनी आंखों से देखी और उसी शाम लाहौर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पंजाब केसरी लाला लाजपत राय ने कहा- मैं यह घोषणा करता हूं कि मुझ पर जो लाठियां बरसाई गई हैं, वे भारत में ब्रिटिश सरकार की अंतिम कीलें साबित होंगी। सभा स्थल में उपस्थित क्रांतिवीर यशपाल और सुखदेव ने देखा कि लाला जी के भाषण का एक अंग्रेज अधिकारी नील मजाक उड़ा रहा घृणापूर्ण हंसी हंस रहा था, लेकिन भारत के लाडले क्रांतिपुंजों के लिए यह हंसी असहनीय थी। 17 नवंबर के दिन लालाजी लाठियों के घाव न सहते हुए शहादत पा गए, पूरा देश शोक पूर्ण क्रोध से हुंकार उठा। नवयुवकों के लिए यह चुनौती थी, भगत सिंह और उनके साथियों के लिए यह राष्ट्र का अपमान था। उन्होंने नारा लगाया - खून का बदला खून। एक पंजाब केसरी की हत्या का बदला दस गोरों को मारकर लिया जाएगा। क्रांतिकारियों के संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी की एक हंगामी किंतु गुप्त मीटिंग 10 दिसंबर, 1928 की रात को लाहौर में हुई। जिसकी अध्यक्षता चंद्रशेखर आजाद ने की। इसमें भगत सिंह, महावीर सिंह, सुखदेव, राजगुरु, दुर्गा भाभी, किशोरी लाल तथ जय गोपाल ने भाग लिया। विचार-विमर्श के पश्चात यह निर्णय हुआ कि इस सारे कार्य को भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के साथ आजाद और जयगोपाल संपन्न करेंगे। इन्हें सुरक्षित बाहर ले जाने का कार्य दुर्गा भाभी को सौंपा गया। निर्णयानुसार राजगुरु और भगत सिंह स्काट पर गोली चलाने तथा पीछे से सुरक्षित रखने के लिए आजाद और सुखदेव तय किए गए। क्योंकि इन्होंने समरतंत्र तथा फायर एंड मूवमेंट में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था और उसी दिन भारत मां एक बार मुस्कुरा दी। पंजाब के बेटों ने लाला लाजपत राय के खून का बदला खून से लिया। सांडर्स और उसके कुछ साथी गोलियों से भून दिए गए। 
शहीद शिरोमणि त्रिमूर्ति भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भारत मां की स्वतंत्रता के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए। अंतिम श्वास तक सिंह गर्जना करते रहे- इंकलाब जिंदाबाद, डाउन, डाउन यूनियन जैक, राष्ट्रीय झंडा ऊंचा रहे और अंग्रेजी साम्राज्यवाद का नाश हो। सांडर्स की हत्या के बाद लाहौर से सुरक्षित निकलकर भगत सिंह कलकत्ता पहुंच गए। कुछ दिन वहां रहकर वह बंगाल तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों से भेंट विचार करते दिल्ली पहुंचे। उन्हीं दिनों अंग्रेज सरकार दिल्ली की असेंबली में पब्लिक सेफ्टी बिल तथा ट्रेड डिस्प्यूट््स बिल लाने की तैयारी में थी। यह बहुत ही दमनकारी कानून थे और सरकार उन्हें पास करने का फैसला कर चुकी थी। शासकों का इस बिल को कानून बनाने के पीछे उद्देश्य यह था कि जनता में क्रांति का जो बीज पनप रहा है, उसे अंकुरित हेने से पहले ही समाप्त कर दिया जाए। क्रांतिकारियों की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भगत सिंह ने कहा- ब्रिटिश साम्राजयवाद में न्याय के लिए कोई स्थान नहीं है। वे दासों को सांस लेने का अवसर दिए बिना ही उन्हें दबाना एवं लूटना चाहते हैं और इन्हें रोकने का एक उपाय है- बलिदान। गंभीर विचार-विमर्श के बाद 8 अपै्रल 1929 का दिन असेंबली में बम फेंकने के लिए तय हुआ और इस कार्य के लिए भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त निश्चित हुए। यद्यपि असेंबली के बहुत से सदस्य इस दमनकारी कानून के विरुद्ध थे, तथापि वायसराय इसे अपने विशेषाधिाकार से पास करना चाहता था। इसलिए यही तय हुआ कि जब वायसराय पब्लिक सेफ्टी बिल को कानून बनाने के लिए प्रस्तुत करे, ठीक उसी समय धमाका किया जाए और वह किया भी गया। जैसे ही बिल संबंधी घोषणा की गई, तभी भगत सिंह ने बम फेंका, पर इस ढंग से जिस से वि_ल भाई पटेल और मोती लाल नेहरू को चोट न लगे। दूसरा बम बटुकेश्वर दत्त ने फेंका, पूरा हाल धुएं से भर गया, दौड़ भाग मच गई। भगत सिंह और दत्त  वहीं दृढ़ता से खड़े रहे। उन्होंने एक पत्रक भी फेंका, जिस में लिखा था- बहरे को सुनाने के लिए ऊंची आवाज की जरूरत होती है। 23 मार्च 1931 की संध्याकाल को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु- देशभक्ति के अपराधी कहकर फांसी पर लटका दिए गए। यह भी माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी, लेकिन जनाक्रोश से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही इन वीरों की जीवनलीला समाप्त कर दी और आधी रात के अंधेरे में ही सतलुज के किनारे इनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। 24 मार्च को यह समाचार जब देशवासियों को मिला तो लोग वहां पहुंचे जहां इन शहीदों के शरीर की पवित्र राख और कुछ अस्थियां पड़ी थीं। देश के दीवाने उस राख को ही सिर पर लगाए, उन अस्थियों को संभाले अंग्रेजी साम्राज्य को उखाड़ फेंकने का संकल्प लेने लगे। देश और विदेश के प्रमुख नेताओं और समाचार पत्रों ने अंग्रेजी सरकार के इस काले कारनामे की तीव्र निंदा की। इन शहीदों को प्रणाम करते हुए श्रद्धानत हो केवल इतना कह सकते हैं-तुमने दिया देश को जीवन, देश तुम्हें क्या देगा अपनी आंच तेज रखने को नाम तुम्हारा लेगा। शहीदों के रक्त से रंजित भारत की भूमि आधी अधूरी स्वतंत्रता को पा गई, पर हम शहीदों के सपनों को पूरा नहीं कर पाए। देश से भय, भूख और भ्रष्टाचार जब समाप्त कर पाएंगे वही हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अपने भारत देश में जब करोड़ों लोग रात को भूखे सोते हैं तो शहीदों को नाटकीय श्रद्धांजलि देना अर्थहीन हो जात है। शहीदों के स्वप्न साकार करने का दायित्व हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ी को संभालना ही होगा। 

Image result for laxmikanta chawla

लेखिका प्रो.लक्ष्मीकांता चावला, पंजाब की पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेत्री हैं।

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 9814266688 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें ।


भारत के इस तेज गेंदबाज ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से लिया संन्यास

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारत के पूर्व तेज गेंदबाज परव...

गणेश चतुर्थी प्लास्टिक के बिना मनाएं : दीया मिर्जा

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): गणेश चतुर्थी का त्योहार सितंबर में मनाया जाता है। वहीं अभिनेत्...

top