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घर का भेदी....

Publish Date: March 30 2018 04:47:05pm

''बाणों से बींधा हुआ तथा फरसे से काटा हुआ वन भी पनप जाता है किंतु कटु वचन कह कर वाणी से किया हुआ भयानक घात कभी नहीं भरता'' विदुर नीति। 'अपनी उन्नति और अवनति सभी वाणी के अधीन है' चाणक्य सूत्र। वाणी के कारण ही पाण्डवों और कौरवों में युद्ध हुआ था और वाणी के कारण ही आज भी परिवार टूट रहे हैं, जब साधारण परिवार में झगड़ा होता है तो उसमें लोग कोई विशेष रुचि नहीं दिखाते, लेकिन जब परिवार नामी है तो घर का झगड़ा लोगों के आकर्षण का कारण बन जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अधिकतर लोगों की कोशिश होती है की घर का मामला घर पर ही सुलझा लिया जाए। जब मुद्दा सत्ता का हो या संपत्ति का हो तो फिर लड़ाई सार्वजनिक हो जाती है। ऐसी ही घटना पंजाब विधानसभा में देखने को मिला जब मनप्रीत बादल ने अपने ताया व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल उनके बेटे पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल और उनके साले व पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया विरुद्ध अपनी वाणी के तीर छोड़े।

बादल परिवार पर निशाना साधते हुए मनप्रीत बादल ने कहा कि कहावत है कि घर का भेदी लंका ढाता है और मेरे पास भी बादल परिवार के बारे में बहुत कुछ है और चाहूं तो लंका ढहा सकता हूं। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि पंजाब की 70 साल की हिस्ट्री में, बादल सी.एम. थे, उनका लड़का उपमुख्यमंत्री, लड़के का साला मंत्री, बादल साहिब के जंवाई मंत्री और सुखबीर सिंह बादल की घरवाली सैंटर में मंत्री है, ऐसा उदाहरण कभी नहीं और कहीं नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि हम लोग एक ही दादा के वारिस हैं और जमीन जायदाद भी बराबर की बंटी थी, लेकिन आज बादलों के घर काम करते नौकर और मुंशियों की कोठियां और प्रॉपर्टी भी मनप्रीत से ज्यादा है। मनप्रीत ने कहा कि उन्होंने 6 बार विधानसभा में बजट पेश किया है और फिर भी उन्हें वित्त विभाग चलाना नहीं आता, जबकि उन्होंने दिल्ली में कई बार वित्त मंत्री होने के नाते मीटिंग की है। हर बार अपनी जेब से जहाज की टिकट खर्च किया है, जबकि बादलों ने 15 करोड़ सिर्फ हवाई सफर में खर्च किए थे। मनप्रीत यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि 2017 के चुनाव से कुछ समय पहले प्रकाश सिंह बादल अपने दिल का इलाज करवाने के लिए अमरीका गए थे, वहां एयरपोर्ट में 15 मिनट रुकना पड़ा था जिसके चलते पंजाब के खजाने पर 40 लाख का आर्थिक बोझ पड़ा था।

पंजाब के तरक्की के मंसूबे हेतु हमेशा ही कांग्रेस पार्टी की कोशिश रही है। चाहे भाखड़ा डैम, कृषि यूनिवर्सिटी, हरित क्रांति और चंडीगढ़ जैसे शहर का उदाहरण कहीं और नहीं है बादल कह रहे हैं सब कुछ उनके ही समय में हुआ है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव 2017 के 1 दिन पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने एक नीति के तहत राज्य पर 30 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ डाला दिया, जबकि केन्द्र सरकार इसको 3 हिस्सों में बांटना चाहती थी, जिनमें 10,000 करोड़ बैंकों पर, 10,-000 करोड़ फूड सप्लाई और 10,000 करोड़ पंजाब के हिस्से आता है।

मनप्रीत बादल ने कहा कि जब बिक्रम सिंह मजीठिया की बहन की शादी हुई तो इस परिवार ने गाड़ी किस्तों पर लेकर दहेज में दी थी, आज यह बड़ी-बड़ी गाडिय़ों में घूम रहे हैं। पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि मेरी ताई जी के भोग पर लंगर एस.जी.पी.सी ने लगाया था, यहां तक कि उनका सारा इलाज भी सरकारी खजाने से हुआ था, जबकि इनकी बसें चल रही हैं और इनके होटल हैं। मनप्रीत बादल ने कहा कि यह आज कह रहे हैं कि मुझे वित्त विभाग नहीं चलाना आता और मुझ पर सवाल कर रहे हैं। मनप्रीत ने कहा कि जिन्होंने चिट्टा बेचा और पंजाब को बेचा वह मुझ पर सवाल उठा रहे हैं। मनप्रीत ने कहा कि मुझे बसें चलानी नहीं आती, मुझे चिट्टा बेचना नहीं आता है। यहां तक कि मुझे खजाना लूटना नहीं आता है।

वित्त मंत्री मनप्रीत द्वारा छोड़े गए वाणी के तीरों के जवाब में अकाली बादल के नेताओं ने कहा कि पंजाब विधान सभा में पहली बार ऐसा हुआ है कि वित्त मंत्री ने बजट के लिए दिए समय को अपने शरीके परिवार पर इस्तेमाल किया है। मनप्रीत बादल ने जब स. प्रकाश सिंह बादल के मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दिया था, उसी दिन से सबको एहसास हो गया था कि एक दिन ऐसा आएगा जब बादल परिवार सार्वजनिक रूप से एक दूसरे को कटघरे में खड़ा कर वाणी के तीर चलाएंगे। स. प्रकाश सिंह बादल ने अपने छोटे भाई मनप्रीत बादल के पिता के प्रति शायद ही कभी कटु शब्द सार्वजनिक रूप से कहे होंगे लेकिन मनप्रीत, सुखबीर व मजीठिया में से किसी ने भी तंज कसने के अवसर को हाथ में से जाने नहीं दिया। पंजाब की राजनीति पिछले करीब छ--: दशक से बादल परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है लेकिन परिवार में रंजिश के कारण आज परिवार की साख ही दांव पर लग गई है। वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने पंजाब विधानसभा में स. प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल तथा बिक्रम मजीठिया को लेकर जो कुछ कह दिया है उससे स्पष्ठ है कि बादल परिवार की आपसी रंजिश की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं। आने वाले समय में बादल परिवार का झगड़ा और बढ़ेगा ही और नुकसान दोनों परिवारों का ही होगा। राजनीतिक मतभेद तक तो बात ठीक थी लेकिन अब मनभेद वाली स्थिति है और मर्यादाएं भी तोड़ी जा रही हैं। मनप्रीत बादल का कहना है कि घर का भेदी हूं बहुत कुछ कह सकता हूं दर्शाता है कि निकट भविष्य में अभी बहुत कुछ सामने आने वाला है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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