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राजनीति

साम्प्रदायिक दंगे

Publish Date: March 31 2018 06:05:09pm

पश्चिम बंगाल और बिहार में रामनवमी शोभा यात्रा के दौरान शुरू हुए साम्प्रदायिक दंगे अभी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। रामनवमी पर्व पर शोभा यात्रा दशकों से निकल रही है, लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल के रानीगंज और बिहार के औरंगाबाद में शोभा यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी और झगड़ों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देश की राजनीति में आए परिवर्तन को जो वर्ग बर्दाश्त नहीं कर रहा वह किसी न किसी कारण स्थिति को खराब कर मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले कर्नाटक, मध्यप्रदेश तथा राजस्थान के साथ अन्य प्रदेशों के होने वाले विधानसभा चुनावों को सम्मुख रख कुछ राजनीतिक दल स्थिति को तनावपूर्ण बना कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। आजादी के पश्चात सत्ताधारियों ने बांटों व राज करो की नीति जो अंग्रेजी हुकूमत की देन थी उसको तो अपनाया ही साथ में तुष्टिकरण की राह पर चलते हुए देश के बहुमत समुदाय की भावना से भी खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। गत सात दशक से तुष्टिकरण की राह पर चलने वाले दलों को जब राजनीतिक स्तर पर झटका लगा और वह सत्ता से बाहर हो गए तब सत्ता में आई नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा व उनके सहयोगी दलों की सरकार को बदनाम करने के लिए उस पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगाया जाने लगा। मोदी सरकार ने तो 'सबका साथ और सबका विकास' का नारा दिया और नीतियां भी इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु बनाईं। मोदी सरकार ने पिछले वर्षों में आम जनता की भलाई व देश में भ्रष्टाचार कम करने हेतु प्रमुख तौर पर इन योजनाओं को लागू किया है।* प्रधानमंत्री जन धन योजना * प्रधानमंत्री आवास योजना * प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना * प्रधानमंत्री मुद्रा योजना * प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना * प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना * अटल पैंशन योजना * संसद आदर्श ग्राम योजना * प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना * प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना * प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनाएं * प्रधानमंत्री जन औषधि योजना * मेक इन इंडिया * स्वच्छ भारत अभियान * किसान विकास पत्र * सायल हैल्थ कार्ड स्कीम * डिजिटल इंडिया * स्किल इंडिया * बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना * मिशन इंद्रधनुष * दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना * दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना * पंडित दीन दयाल उपाध्याय श्रमेव जयते योजना * अटल मिशन फॉर रैजुवैंशन एंड अर्बट ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना) * स्वदेश दर्शन योजना * पिल्ग्रिमेज रैजुवैंशन एंड स्पिरिचुअल ऑग्मैंटेशन ड्राइव (प्रसाद येजना) * नैशनल हैरिटेज सिटी डिवैल्पमैंट एंड ऑग्मेंटेशन योजना (हृदय योजना) * उड़ान स्कीम * वन रैंक, वन पैंशन (ओ.आर.ओ.पी.) स्कीम * स्मार्ट सिटी मिशन * गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम * स्टार्टअप इंडिया, स्टैन्डप इंडिया * डिजिटिलीकरण* इंटीग्रेटेड पावर डिवैल्पमैंट स्कीम * श्याम प्रसाद मुखर्जी रूरल मिशन सागरमाला प्रोजैक्ट * 'प्रकाश पथ' और 'वे टू लाइट'* उज्जवल डिस्कॉम इंशोरैंस योजना विकल्प स्कीम * नैशनल स्पोटर््स टैलेंट सर्च स्कीम * राष्ट्रीय गोकुल मिशन * पहल- डायरैक्ट बैनिफिट्स ट्रांसफर फॉर एल.पी.जी. (डी.बी.टी.एल) कंज्यूमर्स स्कीम * नैशनल बाल स्वछता मिशन।
मोदी सरकार ने कालेधन पर काबू करने हेतु जहां नोटबंदी की वहीं जीएसटी लागू कर देश को आर्थिक रूप से एकजुट करने का भी क्रांतिकारी कदम उठाया, जब विपक्षी दलों को मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई उपरोक्त योजनाओं और उठाए कदमों का कोई ठोस जवाब न मिला तो मोदी सरकार पर साम्प्रदायिक होने व हिन्दुत्व समर्थक होने का आरोप लगाकर मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयास शुरू कर दिए।  उनके प्रयासों को उस समय बल मिला जब सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के हक में तीन तलाक सहित अन्य ऐसी परम्पराओं विरुद्ध कदम उठाए। मोदी सरकार द्वारा उठाए गए उपरोक्त कदमों को मुस्लिम विरोधी कह कर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने वालों ने हिन्दुत्व के नाम पर भी मोदी सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया। विपक्षी दलों द्वारा अपनार्ई नीति के परिणामस्वरूप ही शरारती तत्वों को प्रोत्साहन मिला और उस वर्ग ने रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। क्रिया की प्रतिक्रिया का ऐसा सिलसिला चला जिस कारण जानमाल का भारी नुक्सान तो हुआ ही साथ में देश के नाम पर भी धब्बा लगा। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, देश की सरकार को संविधान अनुसार ही कार्य करना होता है, लेकिन स्वार्थ प्रेरित राजनीतिक दल द्वारा ऐसा भ्रम पैदा किया जा रहा है जैसे मोदी सरकार संविधान से बाहर ही कार्य कर रही हो। जबकि सत्य यह है कि नरेन्द्र मोदी की सरकार देश के संविधान अनुसार ही कार्य कर रही है और देश हित ही उसकी प्राथमिकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रदेश सरकार की जिम्मेवारी होती है, लेकिन पश्चिम बंगाल और बिहार में हो रही हिंसा के लिए केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि गलत है। 
तुष्टिकरण की राह पर चलने वाले दल जितनी मर्जी भ्रांतियां व भ्रम फैलाएं अंत में राजनीतिक हानि का सामना उन्हें ही करना पड़ेगा, क्योंकि देश के जन की भावनाओं को अनदेखा कर कोई भी राजनीतिक दल अधिक देर तक नहीं चल पाएगा। समय की मांग है कि राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर साम्प्रदायिक दंगों पर काबू पाने के लिए पक्ष और विपक्ष को एकजूट होकर कार्य करने चाहिए। भावनाओं को भड़काने की कोशिश न करें और स्थिति को सामान्य बनाएं।  हिंसा के दौरान जान-माल की जो हानि हुई है उन सब को आर्थिक सहायता देनी चाहिए तथा यह संदेश भी स्पष्ट जाना चाहिए की कानून से ऊपर कोई नहीं है तथा दोषी को दंड मिलना चाहिए।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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