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कर्नाटका चुनाव परिणाम

Publish Date: May 16 2018 12:56:33pm

कर्नाटका विधानसभा चुनाव परिणाम भाजपा के लिए खुशी और गम जैसे हैं। खुशी इस बात की है कि वह प्रदेश में सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में सामने आई है। लेकिन गम इस बात का कि वह सत्ता से अभी दूर ही है, क्योंकि 112 के जादुई आंकड़े से पीछे रह गई है। कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले काफी कम सीटें मिली हैं। राजनीतिक रूप से कर्नाटका विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को झटका ही लगा है लेकिन कांग्रेस को खुशी इस बात की है कि उसकी योजना अनुसार जेडीएस ने कांग्रेस के समर्थन को स्वीकार कर लिया है और कांग्रेस की योजनानुसार दोनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल से मिल सत्ता के लिए अपना दावा भी पेश कर दिया है।

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली से गुजरात पहुंच चुके हैं और भाजपा भी बतौर सबसे बड़ी पार्टी अपना दावा राज्यपाल के सम्मुख पेश करने की घोषणा कर चुकी है। कर्नाटका के चुनाव परिणामों में अगर सबसे अधिक लाभजनक स्थिति में कोई है तो वह देवगौड़ा तथा उनका बेटा कुमार स्वामी और उनकी पार्टी जेडीएस ही है। देवगौड़ा के बेटे कुमार स्वामी को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार कर कांग्रेस ने भाजपा के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण बना दी है। भाजपा का राज्यपाल के विवेक पर ही भविष्य टिका हुआ है। कांग्रेस और जेडीएस ने जिस फुर्ती से कार्य किया है, उससे स्पष्ट हो रहा है कि दोनों दलों ने त्रिशंकु विधानसभा आने की संभावना को लेकर पहले ही सोच विचार कर अपनी भावी नीति को बना लिया होगा।

सत्ता के लिए दावा पेश करने में भाजपा पीछे रह गई है लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए इस बारे कोई निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता। भाजपा जादुई अंक तक पहुंचने के लिए अगर  जोड़-तोड़ न करे तो शायद 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में उसे लाभ ही मिलेगा। कांग्रेस और जेडीएस में जो समझौता हुआ है वह भी 2019 के लोकसभा चुनावों को सम्मुख रख ही हुआ है। कांग्रेस ने जहां प्रदेश में भाजपा को सत्ता से रोकने के लिए जेडीएस को समर्थन दिया है वहीं वह लोकसभा चुनावों में जेडीएस से समर्थन चाहेगी। कांग्रेस की प्राथमिकता कर्नाटक चुनाव नहीं बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव ही हैं। इसी उद्देश्य से कांग्रेस ने जेडीएस से बिना किसी देरी व शर्त के गठबंधन कर लिया। इस बात को लेकर कांग्रेस भीतर मतभेद है।

गठबंधन चुनाव बाद हुआ है इसलिए राज्यपाल के पास यह विकल्प अभी भी है कि वह भाजपा को बतौर सबसे बड़े राजनीतिक दल के न्यौता दे दे। अगर राज्यपाल ऐसा करते हैं तो भाजपा को कर्नाटका की राजनीति में कुछ जोड़-तोड़ करने का अवसर अवश्य मिलेगा। अगर भाजपा जोड़-तोड़ करने में सफल रहती है तो वह एक नकारात्मक चर्चा का ही मुद्दा बनेगी। जिसका नुकसान उसे वर्तमान और भविष्य दोनों में होने की पूरी संभावना है। भाजपा को सत्ता प्राप्ति के लिए कोई अनैतिक गठबंधन व जोड़-तोड़ अभी नहीं करना चाहिए। दो-चाह माह पश्चात कांग्रेस व जेडीएस गठबंधन शायद भाजपा को स्वयं जोड़-तोड़ करने का अवसर दे देगा, भाजपा को उसी अवसर का इंतजार करना चाहिए। कर्नाटका की जनता ने तीनों प्रमुख दलों को सत्ता के न•ादीक लाकर भी सत्ता सुख से दूर ही रखा हुआ है। गठबंधन कितनी देर सही दिशा में चलता है, उसी आधार पर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के परिणाम को ले अंदाजा लगाया जा सकेगा, भाजपा को उचित समय का इंतजार करना चाहिए। जल्दबाजी करने में भाजपा को राजनीतिक नुकसान होने की संभावना अधिक है। कर्नाटक चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि राहुल गांधी को अभी भी बतौर प्रधानमंत्री लोगों ने स्वीकार नहीं किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू आज भी चल रहा है।
 

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