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हिमाचल पुष्प क्रांति

Publish Date: July 11 2018 10:49:11am

हिमाचल प्रदेश को प्रकृति ने वैसे ही बहुत खूबसूरत बनाया है, इसके रहने वालों पर प्रकृति बहुत मेहरबान है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सुन्दरता को बढ़ाने व किसानों की आर्थिक हालत को मजबूत करने के लिए बागवानी को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। प्रदेश में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने 150 करोड़ रुपए की एक महत्वाकांक्षी पंच वर्षीय योजना बनाई है। इस योजना को लागू करने के लिए बागवानी विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

योजना का लक्ष्य फूलों की व्यावसायिक खेती और सजावटी पौधों की खेती को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर सृजित करके आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश को एक पुष्प राज्य के तौर पर उभारना। प्रदेश मे इस समय 643 हैक्टेयर भूमि पर पांच हजार कृषक फूलों की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। इसका कारोबार बाजार 87.25 करोड़़ रुपए है। प्रदेश में मुख्यत: गेंदा, गुलाब, ग्लैडियोरस, गुलदाउदी, कारनेशन, लिलियम, जरबैरा तथा अन्य मौसमी फूल उगाए जाते हैं। इस समय प्रदेश में कट फ्लावर का उत्पादन 16.74 करोड़ रुपए का हो रहा है। जबकि गेंदा और गुलदाउदी जैसे फूलों का लगभग 12347 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। सरकार की इस योजना के तहत ग्रीन हाउस व शेड नेट हाउस स्थापित करने के लिए कृषकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि वह उन विदेशी फूलों जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंडियों में विशेष मांग रहती है, की खेती कर सके। प्रदेश में एलस्ट्रोमेरिया, लिमोनियम, आइरिस, ट्यूलिप व आर्किड जैसे फूलों की किस्मों को उगाने की व्यापक संभावनाएं हैं।

फूलों का विपणन, किसानों को प्रशिक्षण, उन्हें बढिय़ा किस्म का बीज व वल्ब इत्यादि उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि कृषकों को उत्पादन के बाद आने वाली विपणन चुनौतियों का सामना न करना पड़े और उन्हें बीज प्राप्त करने और परामर्श के लिए भटकना न पड़े। कृषकों को एकीकृत बागवानी तर्ज पर ही नई योजना में प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगी ताकि कृषक इसका लाभ उठा सकें।  बागवानी विभाग ने फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही कई योजनाएं चला रखी हैं जिसके कारण कृषक फूलों की खेती करने के प्रति प्रेरित हुए हैं। प्रदेश में इस समय छह फूलों की नर्सरियां शिमला के नवबहार और छराबड़ा, सोलन जिला के परवाणु, कुल्लू के बजौरा तथा कांगड़ा के धर्मशाला तथा भटुआं में स्थित है। इसके अलावा चायल और पालमपुर में मॉडल फूल उत्पादन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें गुणवत्ता वाली फूलों की किस्में उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार का उपरोक्त फैसला स्वागत योग्य है और इससे प्रदेश के किसान को लाभ मिलेगा और प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि फूलों के खेत पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे। सरकार को उपरोक्त कदम के साथ-साथ प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पक्षियों को केंद्र में रख कर बड़ी सेंचयूरी उन्नत करनी चाहिए। विदेशों में पर्यटकों के आकर्षण के लिए बाग-बगीचे, चिडिय़ाघर व जल-खेलों से जुड़े स्थलों को बढ़ावा दिया जाता है। हिमाचल प्रदेश में भी उपरोक्त तरह के पर्यटक स्थल बनाये जा सकते हैं। पर्यटकों को बुनियादी सहूलतें भी मिले, यह बात भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। 

पिछले दिनों शिमला, धर्मशाला व कुल्लू-मनाली सहित वहां की बुनियादी सेवाएं लडख़ड़ा गई थी जिस कारण पर्यटकों को बढ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। स्थानीय होटलों पर भी राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल की तलवार लटक रही है। इस समस्या का भी कोई स्थाई हल ढूंढना चाहिए ताकि प्रदेश में होटल उद्योग बचा रहे। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि वर्तमान जयराम ठाकुर की सरकार हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने व प्रदेश में रोजगार पैदा करने के लिए कई सकारात्मक कदम उठा रही है, जिसका लाभ निकट भविष्य में प्रदेश को मिलने वाला है, पुष्प क्रांति उन कदमों में से एक है।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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