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नशे विरुद्ध

Publish Date: August 09 2018 01:13:00pm

पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश को नशा मुक्त करने के लिए राज्य सरकार को कई प्रकार के सुझाव भी दिए और नशे को लेकर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट भी तलब की है। गौरतलब है कि मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज मुकद्दमों में पिछले समय में वृद्धि हुई है। प्रदेश में 28 प्रतिशत युवा नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। प्राप्त सूचनाओं अनुसार हिमाचल प्रदेश पुलिस पंजाब की सीमा से लगते क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा रही है। इससे पहले की बात पंजाब व हरियाणा की करें पहले उन सुझावों पर ध्यान दें जो हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दिए हैं।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकार को सुझाव दिया है कि पाठशालाओं में बच्चों को मादक पदार्थों के दुष्परिणामों के बारे में बताने के लिए पाठ्यक्रम में लेक्चर शामिल किया जाए। यही नहीं, स्कूलों, कालेजों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों में नशे के आदी युवाओं को अच्छी सलाह-मशविरा दिया जाए ताकि वे जीवन नहीं बल्कि नशे को त्यागें। सरकार को संसाधनों की कमी का बहाना बनाने पर आगाह किया गया है। प्रदेश उच्च न्यायालय का यह सुझाव बहुत अच्छा है कि शोध संस्थाओं की सेवाएं लेकर स्थानीय लोगों को भांग व अन्य नशीले पदार्थों के औषधीय गुणों के बारे में बताया जाए। भांग की खेती नशे के लिए नहीं, बल्कि औषधियां बनाने के लिए की जाए। खेती को फिर चोरी छिपे करने की आवश्यकता नहीं होगी। 

शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नशा बेचने वाले कैमिस्टों व मेडिकल प्रैक्टिशनरों पर कड़़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ढाबों, दुकानों, कैंटीनों व होटलो-रेस्टेरेंटों की भी समय-समय पर जांच होनी चाहिए। विधिक सेवा प्राधिकरण की सेवाएं लेने का भी सुझाव दिया है ताकि इस दिशा में अच्छे प्रयास किए जाएं। एक विशेष जांच दल बनाने को भी कहा व इसमें पुलिस के अलावा अन्य एजेंसियां भी शामिल होनी चाहिए। नशे की तस्करी के लिए गरीब बच्चों को जरिया बनाया जाता है। न्यायालय ने पाया कि नशे का कारोबार स्थानीय लोगों व धंधा चलाने वालों के गठजोड़ से खूब फल-फूल रहा है। पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करने का भी न्यायालय ने सुझाव दिया है। ऐसे में अगर कोई जनप्रतिनिधि पकड़ा जाए तो उसे अयोग्य घोषित किया जाए। साथ ही उन पंचायतों को इनाम दिया जाए जो नशामुक्त हों। नशे के खात्मे के लिए अगर कोई समाजसेवी व सामाजिक संस्था सहयोग करती है तो उसकी भी पीठ थपथपाई जाए। इस बाबत पुलिस को सूचना देने वालों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए। नशे के चंगुल में फंसे लोगों के पुनर्वास के भी प्रयास होने आवश्यक हैं। नशे की रोकथाम को पुलिस थाना स्तर पर समितियां बनाएगी व स्थानीय लोगों को व्हाट्स ग्रुप में शामिल करेगी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी प्रदेश को नशा मुक्त करने के लिए अभियान छेडऩे की बात कही है। इस कुरीति से मुक्ति पाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री को हर प्रकार का सहयोग देने व मिलकर कार्य करने की बात कही है। गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि नशे की तस्करी को रोकने हेतु हरियाणा सरकार सहयोग दे। उस पत्र के उत्तर में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कै. अमरेन्द्र सिंह को पत्र लिख कर कहा है कि ‘हरियाणा सरकार नशीली दवाओं के तस्करी और बिक्री पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के लिए दूसरे राज्यों के साथ सहयोग करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। देश के युवाओं के भविष्य के लिए नशे की लत को सबसे गंभीर समस्या बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ड्रग उत्पादक राज्य नहीं है। 

हरियाणा पुलिस ने न केवल तस्करी की दवाओं की बिक्री में शामिल व्यक्तियों को पकडऩे के लिए कड़े कदम उठाए हैं बल्कि उनकी तह तक पहुंचने और परिवहन मार्गों का भी पता लगाने के लिए भी कड़े कदम उठाए हैं। पंजाब पुलिस द्वारा खूफिया सूचना सांझा करने में और सुधार लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच सूचना सांझा करने और योजना विकसित करने के लिए नियमित बोर्डर जिला बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, जब भी पंजाब पुलिस द्वारा कोई सटीक और प्रामाणिक जानकारी सांझा की जाती है तो मैं सख्त और त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन देता हूं।’

पंजाब में बढ़ते नशे के कारण आये दिन युवाओं की मौत के समाचार मिलते रहते हैं। नशे के कारण हजारों परिवार तबाह हो चुके हैं। पंजाब एक सीमावर्ती प्रदेश है और सीमा पार से नशे के तस्कर बड़ी मात्रा में पंजाब में नशा भेजते हैं। पंजाब पुलिस और सीमा सुरक्षा बलों ने मिलकर नशीले पदार्थों की सप्लाई पर कुछ अंकुश तो लगाये हैं लेकिन इस मामले में बहुत कुछ होने वाला है। हरियाणा की एक सीमा पंजाब से लगती है तो दूसरी राजस्थान से और राजस्थान की पाकिस्तान से। पंजाब की तरह राजस्थान सीमा से भी नशे की तस्करी होती है और वह हरियाणा से हो पंजाब पहुंच जाती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कै. अमरेन्द्र सिंह ने हरियाणा को नशे विरुद्ध अभियान में सहयोग देने की बात कही थी।

हिमाचल प्रदेश में मनाली व कुल्लू में तो अफीम की खेती की जाती है, अवैध ढंग से हुई खेती की उत्पाद भी आस-पड़ोस के प्रदेशों में ही खपत होती है। अब तो हिमाचल प्रदेश में भी नशीले पदार्थों की खपत बढ़ रही है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तीनों प्रदेशों में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण युवा पीढ़ी पर शारीरिक व मानसिक रूप से बुरा प्रभाव पड़ रहा है। वही परिवारों की आर्थिक स्थिति भी कमकाोर होती जा रही है। इसीलिए पैसे की तंगी और नशीले पदार्थों की चाहत के बीच बढ़ते असंतुलन के कारण घर-परिवार टूट रहे हैं। नशे विरुद्ध अभियान में राज्य सरकारों का साथ जब तक समाज नहीं देगा तब तक नशे विरुद्ध अभियान में कोई बड़़ी सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती। 

नशे विरुद्ध अभियान को सफल बनाने हेतु समाज को सक्रिय हो सरकारों का समर्थन करना होगा, तभी नशे विरुद्ध अभियान सफल होगा। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए सुझाव सभी प्रदेशों के लिए लाभदायक हो सकते हैं, उन पर गौर कर अमल करने की आवश्यकता भी है।



इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।  

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