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धर्म परिवर्तन

Publish Date: August 31 2018 01:26:41pm

पिछले दिनों झारखंड पुलिस की टीम ने लुधियाना में अवैध रूप से चल रहे पैस्किम मैरी क्रॉस बालगृह पर स्थानीय पुलिस को साथ ले छापा मारा था। पुलिस अनुसार इंद्रनगर में अवस्थित अवैध बालगृह में दूसरे राज्यों के बच्चों को लाकर ईसाई धर्म की पढ़ाई कराई जाती थी। इसी बालगृह में झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के 30, रांची के दो, खूंटी के दो और बिहार के चार बच्चों को धर्मांतरण के लिए लाया गया था। झारखंड के चाईबासा से लुधियाना आई पुलिस ने बताया कि पंजाब पुलिस की ओर से अवैध बालगृह से निकालकर बिहार, रांची और खूंटी के बच्चों को सरकारी बालगृह में रखा गया है। चाईबासा के आहतू थाना प्रभारी बनारसी राम ने बताया कि पश्चिम सिंहभूम जिले के 30 बच्चों को उनके अभिभावक अपने साथ ले गए हैं। हम लोगों को वहां रांची व खूंटी के चार व बिहार के चार बच्चे मिले हैं। बनारसी राम के मुताबिक उक्त बालगृह का संचालक बिहार के गया का रहने वाला है। वह पहले हिन्दू था। बाद में ईसाई बन गया। लुधियाना में वह 1971 से रह रहा है। पैस्किम मैरी क्रॉस बालगृह में उक्त बच्चे दो-तीन साल से रह रहे थे। हम लोगों ने बच्चों से बात की है। बच्चों ने प्रताडऩा की बात से इन्कार किया है। हां, इतना जरूर बताया कि उन्हें ईसाई धर्म के बारे में पढ़ाया जाता था। दान में मिले पैसे से बच्चों का लालन-पालन करने की बात संचालक ने कही है। अवैध बालगृह में पांच से 18 साल तक के 38 बच्चे रखे गए थे, जिनमें तीन बच्चों को पहले ही झारखंड रवाना कर दिया गया है। चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी चेयरमैन जेपी सिंह का कहना है कि बालगृह संचालक ने जो लिस्ट सौंपी है, उसमें सिर्फ बीस बच्चों के एड्रेस व अन्य जानकारी है वह भी अधूरी। बाकी 18 बच्चों बाबत तो जानकारी नाम मात्र ही है। न उनका एड्रेस पता है न ही माता-पिता का नाम। अवैध बालगृह में रहने वाले आठ बच्चों को दोराहा के हेवनेली पैलेस में रखा गया है। चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी सदस्य संजय महेश्वरी अनुसार चाईबासा से संबंधित बच्चों को झारखंड पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा, जबकि बिहार से संबंधित बाकी बच्चों के बाबत बिहार सरकार को संदेश भेज दिया गया है।

अब झारखंड पुलिस ने बालगृह संचालक सत्येन्द प्रकाश को धर्म परिवर्तन और अपहरण के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि 30 बच्चे अभी लापता हैं, जिन बारे संचालक से पूछताछ होगी। अवैध बालगृह संचालक का कहना है कि 30 बच्चों को उनके परिवारों को वापस कर दिया गया है। सत्य क्या है यह तो छानबीन के बाद ही सामने आएगा। लेकिन पहली नजर में तो यह बात स्पष्ट है कि बालगृह अवैध रूप से वर्षों से चल रहा है और स्थानीय प्रशासन को उसकी अवैध गतिविधियों का पता न चल सका।

यह देश का दुर्भाग्य है कि भारत की 40 करोड़ के करीब आबादी आज भी गरीबी रेखा के नीचे है और एक वक्त की रोटी के लिए तरस रही है। भारत के इसी कम•ाोर पक्ष का लाभ लेकर ईसाई और मुस्लिम देश धन के बल पर गरीब हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने में लगे हैं। सेवा के नाम पर भारत में बनी गैर सरकारी संस्थाओं को आर्थिक सहायता देकर विदेशी ताकतें भारत में धर्मांतरण कराने का खेल वर्षों से खेलती चली आ रही हैं।

मोदी सरकार ने गैर सरकारी संस्थाओं को विदेशों से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर पिछले समय में जब कानूनी शिकंजा कसा था तब मोदी सरकार को ही कटघरे में खड़ा करने का प्रयास मिशनरी संस्थाओं ने तथा उनसे जुड़े लोगों ने किया था। तथ्यों के उजागर होने से सभी चुप हो गए थे। लुधियाना में जिस तरह धर्म परिवर्तन की बात सामने आई है उसको देखते पंजाब सरकार को प्रदेश में मिशनरी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे बालगृह और महिला गृहों की पहचान कर छानबीन करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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