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देश निर्माण व शिक्षा नीति

Publish Date: September 07 2018 12:56:39pm

देश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका उसकी शिक्षा नीति निभाती है, जिस देश की शिक्षा नीति या शिक्षक कमजोर होता है उसका वर्तमान और भविष्य संकटमय और धूमिल ही होता है। भारत में शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर अतीत में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक नहीं अनेक बार अपनी चिंता प्रकट की थी। पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी ने विश्वविद्यालयों के गिरते स्तर पर  चिंता जताते हुए कहा था कि विश्व के पहले 200 विश्वविद्यालयों में भारत का कोई विश्वविद्यालय नहीं आता। भारत में शिक्षा का लक्ष्य व्यक्ति के निर्माण की जगह केवल नौकरी प्राप्त करना या धन कमाना ही रह गया है।

देश में आज सैकड़ों की तादाद में विश्वविद्यालय स्थापित हो गए हैं। हजारों की तादाद में महाविद्यालय है और लाखों की तादाद में स्कूल हैं। कुछ निजी व सरकारी संस्थाओं को छोड़ दें तो शेष का स्तर कमजोर ही है। यह शिक्षा संस्थाएं तो मात्र डिग्री देने के कारखाने की तरह ही कार्य करती हैं। शिक्षा संस्था का लक्ष्य मात्र धन कमाना ही रह गया लगता है। निजी संस्थाओं का लक्ष्य आर्थिक लाभ रह गया है, तो सरकारी संस्थाएं शिक्षक के लिए आर्थिक सुरक्षा का केंद्र बन कर रह गई है। विद्यार्थी के विकास को लेकर या शिक्षा के स्तर को लेकर शायद ही कोई चिंतित हो।

उपरोक्त स्थितियों को देखते हुए केंद्रीय सरकार आगामी 20 वर्षों के लिए शिक्षा नीति बनाने की तैयारी में है। नई नीति 2020 से लेकर 2040 तक देश में शिक्षा का मार्ग दर्शन करेंगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शिक्षक दिवस पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक, सूचना संचार में हुए बदलाव और भविष्य में समाज की जरूरतों को ध्यान में रखकर नई शिक्षा नीति तैयार की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर घर-परिवार से जुड़ा मामला है। लेकिन दुर्भाग्य से यह चुनावी मुद्दा नहीं बनता है। जावड़ेकर अनुसार पिछले दो वर्षों में बीएड-डीएड के किसी संस्थान को मान्यता नहीं दी गई। अगले सेशन से चार साल का इंटीग्रेटेड कोर्स बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत करीब 14.5 लाख टीचर्स का बैकलॉग है। 12वीं पास अप्रशिक्षित शिक्षकों को बार-बार विस्तार देना पड़ता है। लेकिन उन्हें 2019 तक के लिए अंतिम विस्तार दिया गया है। इनके लिए सरकार ने दो साल का ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध कराया है। इन सभी 14.5 लाख अप्रशिक्षित शिक्षकों को इस प्लेटफॉर्म में रजिस्टर किया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में सबसे ज्यादा बैकलॉग है। एक बार परीक्षा ली गई है। असफल रहने वालों को अगले साल मार्च में फिर मौका मिलेगा। देशभर में 70 से 80 लाख के बीच स्कूल शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं।

पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् जिनका जन्म दिवस 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है ने शिक्षा का देश निर्माण में कितना महत्व है उसको दर्शाते हुए लिखा था 'हम अपने देश का निर्माण ईंट और गारे या हथौड़ी और छेनी से नहीं कर सकते। इसे हमारे देशवासियों के मस्तिष्क और हृदयों में चुपचाप विकसित होना होगा। स्कूलों-कालेजों में हमारे युवकों को इसका शिक्षण दिया जाना चाहिए, हमारे नेताओं द्वारा इसकी घोषणा और इस पर आचरण होना चाहिए और हमारे राष्ट्रीय जीवन की बुनावट में इसे ले आना चाहिए। शिक्षा केवल सूचनाओं का दान-मात्र नहीं है। वह मनोवेगों का प्रशिक्षण है। इससे हमको अनुभूति की प्रणाली और आचरण के अभ्यास की सीख मिलनी चाहिए। हमारी पाठ्य-पुस्तकों में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि हमारी संस्कृति मोहेंजोदड़ो और हड़प्पा से लेकर आज तक किस प्रकार विकसित हुई है और कैसे इसने आत्मनवीनीकरण की शक्ति का प्रदर्शन किया है। बुरी पाठ्य-पुस्तकें तरुणों के मानस को विकृत करती है, उनकी रुचियों को भ्रष्ट करती हैं और उनके स्वभाव को अध:पतित करती हैं। उचित शिक्षा-प्रणाली हमारे देश की अनेकता को अभिप्राय एवं भावना की एकता प्रदान करेगी।'

आजादी से पहले हम अंग्रेजी हकूमत द्वारा अपनाई शिक्षा नीति का विरोध करते थे लेकिन आजादी मिलने के बाद हमने स्वयं ही पश्चिम द्वारा बनाई शिक्षा नीति को अपना लिया। जिस कारण हम अपनी संस्कृति से ही कटते चले गए। हमारे देश में वेदों के काल से लेकर गुरु ग्रंथ साहिब तक अनेक विचारों का विकास तथा ग्रंथों की रचना हुई। वर्तमान शिक्षा नीति में उनका नाम मात्र ही जिक्र है जबकि हमारी शिक्षा नीति का तो आधार ही भारत में जन्मे ऋषियों-मुनियों, संतों तथा गुरुजनों के साथ-साथ भारतीय बुद्धिजीवियों द्वारा रचित साहित्य व कहे वचनों को सबसे अधिक जगह मिलनी चाहिए थी जो नहीं दी गई।

आगामी 20 वर्षों के लिए बनने जा रही शिक्षा नीति की सफलता इसी बात पर निर्भर रहेगी कि वह भारतीय संस्कृति व इतिहास को वह कितना अधिक महत्व देती है। देश निर्माण में शिक्षक तभी सफल हो सकेगा जब शिक्षा नीति में देश से संबंधित साहित्य व संस्कृति को महत्व दिया जाएगा। 

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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