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'टू प्लस टू' वार्ता

Publish Date: September 08 2018 01:19:43pm

भारत और अमेरिका के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों के बीच हुई पहली 'टू प्लस टू' वार्ता के बाद साझा ब्यान में अमेरिका के विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ ने दोनों देशों के बीच हुए समझौते को मील का पत्थर करार दिया। वहीं भारत की रक्षा मंत्री ने कहा कि यह करार भारत की रक्षा क्षमता और तैयारियों को बढ़ाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस समझौते के तहत भारत को अमेरिका से उच्च सैन्य संचार प्रौद्योगिकी हासिल होगी, जिसकी मदद से उसे अपने दुश्मन की गतिविधियों की पल-पल की जानकारी मिलती रहेगी। समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया और यह 10 वर्ष तक प्रभावी रहेगा। अमेरिका से खरीदे गये और कुछ अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म को इस अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकी से लैस किया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिकी रक्षा प्लेटफॉर्म भी भारत को उन्हें मिलने वाली सैन्य जानकारियों और गतिविधियों से अवगत कराएंगे। वहीं, सुषमा स्वराज ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री से एच-1बी वीजा में प्रस्तावित बदलावों को लेकर संतुलित और संवेदनशील तरीके से विचार बनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों का संपर्क प्रभावित होगा, जो द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत और अमेरिका ने 'टू प्लस टू' वार्ता के बाद आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए नहीं हो। दोनों देशों ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि मुंबई, पठानकोट और उड़ी हमले सहित सीमा पार से हुए विभिन्न आतंकवादी हमलों के सरगनाओं को जल्दी से जल्दी न्याय की जद में लाया जाए। सुषमा स्वराज ने कहा कि हमने लश्कर-ए-तैयबा के संबंध में अमेरिका की हालिया घोषणाओं का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण एशिया नीति का स्वागत करता है। पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन रोकने के उनके आह्वान को हमारा समर्थन है। 'टू प्लस टू' वार्ता में दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद, एनएसजी की सदस्यता के भारत के प्रयास और एच1बी वीजा के मुद्दों पर चर्चा की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन की अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ तथा रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस से वार्ता में दोनों देशों ने उनके बीच हॉटलाइन स्थापित करने का भी फैसला किया।

भारत ने उपरोक्त वार्ता से पहले ही यह संकेत दे दिए थे कि रूस और ईरान के साथ रिश्तों के मूल्य पर कोई समझौता नहीं होगा। अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा था कि भारत ईरान से तेल लेना बंद करे और रूस से सैन्य सामग्री भी एक सीमा से आगे न ले। भारत ने रूस और ईरान के रिश्तों को बरकरार रखते हुए अब अमेरिका से जो समझौते किए हैं उसे भारत सैन्य दृष्टि व तकनीकी दृष्टि से और मजबूत हो गया है।

गौरतलब है कि भारत विरुद्ध चीन और पाकिस्तान एकजुट होकर भारत तथा उसके पड़़ोसी देशों पर अपना दबाव बना एक चुनौती देने का प्रयास कर रहे हैं। भारत ने चीन व पाकिस्तान के इरादों को समझते हुए अमेरिका से जो करार किया है वह चीन व पाकिस्तान की शतरंजी चालों का ही जवाब है। अमेरिका भी चीन और पाकिस्तान की नजदीकियों को एक चुनौती के रूप में देख रहा है, इसलिए उसकी रणनीतिक व राजनीतिक प्राथमिकता भारत के साथ संबंधों को मजबूत करना ही है। 'टू प्लस टू' वार्ता ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मजबूत आधार तो दे ही दिया है।

भारत के लिए अमेरिका व रूस सहित विश्व के बड़े देशों से विशेष रूप से सैन्य समझौते करना आवश्यक भी है, क्योंकि भारत का पड़ोसी पाकिस्तान जो आतंकियों की शरणस्थली है और जो भारत के बढ़ते कदमों को रोकना चाहता है वह भारत विरुद्ध हर प्रकार का प्रयास कर रहा है। भारत विरोध पाकिस्तान की राजनीति का केंद्र बिन्दू ही कहा जा सकता है। भारत विरुद्ध वह चार लड़ाइयां लड़ चुका है और भविष्य में लडऩे की तैयारी में है। एक रिपोर्ट अनुसार पाकिस्तान में इस समय 140 से 150 परमाणु हथियार है और अगर वर्तमान स्थिति जारी रहती है तो उम्मीद है कि 2025 तक यह बढ़ कर 220 से 250 हो जाएगी। अमेरिका के रक्षा खुफिया एजेंसी ने 1999 में अनुमान लगाया था कि 2020 में पाकिस्तान के पास 60 से 80 परमाणु हथियार होगा जो इससे 60 से 80 अधिक होकर इस समय अनुमान के मुताबिक 140 से 150 के बीच है। पाकिस्तान परमाणु बल 2018 में हंस एम. क्रिस्टेनसेन, रॉबर्ट एस नोरिस और जुलिया डायमंड ने कहा, हमारा अनुमान है कि अगर वर्तमान स्थिति जारी रही तो 2025 तक देश का परमाणु भंडार वास्तविकता से बढ़ कर कहीं अधिक 220 से 250 के बीच जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान दुनिया का 5वां सबसे बड़ा परमाणु हथियार सम्पन्न देश हो जाएगा।

पाकिस्तान की नापाक हरकतों तथा नकारात्मक नीतियों को सम्मुख रखते हुए भारत और अमेरिका के बीच हुई 'टू प्लस टू' वार्ता एक ऐतिहासिक वार्ता है और दोनों देशों के हित में है। उपरोक्त समझौते के कारण • मिलेगी संवेदनशील सुरक्षा सैन्य तकनीक। • सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130, पी-81 एयरक्राफ्ट, चिनूक-अपाचे हेलीकॉप्टर हासिल करने का रास्ता साफ। • वाणिज्यिक तौर पर उपलब्ध संचार प्रणालियों की जगह हासिल होगी आधुनिकता अमरिकी संचार प्रणाली। • अमेरिकी मूल के प्लेटफार्म और आधुनिक डिफेंस सिस्टम हासिल करने की बाधा दूर। 

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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