Wednesday, December 12,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राजनीति

जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले

Publish Date: December 06 2018 05:40:38pm

देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और स्नेहा कालिता ने देश के वर्तमान और पूर्व सांसदों और विधायकों पर हुए आपराधिक मुकदमों को लेकर जो रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी है उसके अनुसार पिछले तीन दशक से 4122 आपराधिक मामले देश के विभिन्न न्यायालयों में सांसदों व विधायकों के विरुद्ध चल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2324 सांसद- विधायकों और 1675 पूर्व सांसद- विधायकों पर 4122 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई निचली अदालतों में बेहद धीमी है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ 18 केस दर्ज हैं। इनमें से 10 मामलों में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इसके बावजूद उनके खिलाफ चार्जशीट भी दायर नहीं की गई है। केरल में विधायक एमएम मनी के खिलाफ 1982 में हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले का ट्रॉयल शुरू नहीं हुआ है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ 2007 से भ्रष्टाचार का केस लंबित है। इस मामले में अब भी चार्जशीट दायर नहीं की गई। पूर्व सांसद अतीक अहमद के खिलाफ चल रहे 22 मामलों में से 10 मामले हत्या के हैं। इन मामलों का निपटारा पिछले 16 साल में नहीं हुआ। गुजरात में एनसीपी विधायक कंधालभाई सरमनभाई जडेजा के खिलाफ टाडा के तीन मामले चल रहे हैं। इनमें आरोपपत्र दाखिल नहीं किए गए हैं। ओडिशा में चार मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ 100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। अदालत ने इस पर चिंता जताई है। कोर्ट ने पूर्व और वर्तमान सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए बिहार और केरल के सभी जिलों में विशेष कोर्ट बनाने का आदेश दिया। इस बारे में पटना और केरल हाईकोर्ट से 14 दिसंबर तक रिपोर्ट मांगी। केरल में वर्तमान और पूर्व सांसदों और विधायकों पर 312, बिहार में 304 और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 922 केस लंबित हैं। कोर्ट ने कहा कि पहले वह दो राज्यों पर आदेश दे रही है। अन्य राज्यों पर बाद में आदेश जारी करेगी। अदालतें उन मामलों पर जल्दी फैसला करें, जिनमें अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।

देश की सर्वोच्च न्यायालय ने उपरोक्त मामलों को अब प्राथमिकता पर देखने को कहा है। गौरतलब है कि पंजाब में पूर्व विधायक व मंत्री बीबी जागीर कौर को 18 वर्ष बाद अपनी बेटी की हत्या के आरोप में राहत पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा मिली है। इस राहत पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बीबी जागीर कौर ने कहा कि मुझे इंसाफ पाने के लिए 18 वर्ष संघर्ष करना पड़ा। मुकदमे के कारण बीबी जागीर कौर के व्यक्तिगत व सार्वजनिक जीवन को एक बड़ा झटका लगा था। बीबी जागीर कौर को एक वर्ष जेल में भी रहना पड़ा था। गुजरे 18 वर्ष तो वापिस नहीं आ सकते लेकिन भविष्य में किसी को उपरोक्त हालातों में न गुजरना पड़े यह बात तो यकीनी बनाई जानी चाहिए।

तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अपराधी है और केवल धीमी न्याय प्रक्रिया के कारण वह वर्षों जेल की सलाखों के पीछे जाने से बच रहा है तो यह स्थिति भी चिंताजनक है। समय की मांग यह है कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में हो उनसे संबंधित आपराधिक मामलों पर विशेष अदालतों में ही सुनवाई होनी चाहिए तथा सारी प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए। जन सेवा के नाम पर जनता के हक की अनदेखी न हो इस बात को सुनिश्चित करना आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष अदालतों को प्राथमिकता के आधार पर सांसदों व विधायकों के मामले को सुनने का जो आदेश दिया है उससे देश की राजनीति को आपराधीकरण होने से बचाया जा सकेगा।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 7400063000 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें। फेसबुक-टिवटर पर हमसे जुड़ने के लिए www.fb.com/uttamhindu/ आैर www.twitter.com/DailyUttamHindu पर क्लिक करें आैर पेज को लाइक करें।


IPL-12 के लिए होने वाली नीलामी में हिस्सा लेंगे 346 खिलाड़ी

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 1...

MeToo: साजिद खान को IFTDA का बड़ा झटका, 1 साल के लिए किया सस्पेंड

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): यौन उत्पीड़न के आरोप से घिरे सा...

top