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साल 2017 में आरएसएस से 1. 26 लाख नवयुवक ऑनलाईन जुड़े 

Publish Date: March 14 2018 02:02:54pm

जालन्धर (उत्तम हिन्दू न्यूज): पिछले 93 वर्षों से संघ का कार्य सहजता से आगे बढ़ रहा है। धीरे-धीरे संघ के स्वयंसेवकों के द्वारा किये गये कार्य समाज में आम जनमानस को दिखने लगे हैं। जिनके परिणामस्वरूप उनमें संघ के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है और भारी मात्रा में ऐसे युवा संघ से जुड़ रहे हैं। भाषा हमारा संस्कृति का मूल आधार है। अगर अपनी भाषाएं सुरक्षित नहीं रहीं तो अपनी संस्कृति भी सुरिक्षत नहीं रहेगी। अत: जरूरी है कि हम दैनिक क्रियाक्लापों में मातृभाषा का प्रयोग करें। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पंजाब के प्रांत संघचालक  स.  बृजभूषण सिंह बेदी ने पीली कोठी में आयोजित पत्रकार वार्ता में उपस्थित पत्रकारों के समक्ष कही। बेदी जी कल ही नागपुर से संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से वापिस आए और वहां पर हुई चर्चा की जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने भाषा के ऊपर पारित प्रस्ताव की भी चर्चा की। 

बेदी जी ने कहा पिछले वर्ष 36 हजार 729 स्थानों पर 57165 शाखाएं लगती थी जोकि इस बार बढ़कर 37190 स्थानों पर 58967 हो गई हैं। इसके इलावा 24381 स्थानों पर सप्ताह में एक दिन या महीने में एक दिन स्वयंसेवकों का आपस में मिलना होता है। ऐसे स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण की भी वर्षभर योजना रहती है। इस वर्ष 95318 स्वयंसेवकों ने 7 दिन से लेकर 20 दिनों तक का संघ कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया। 

प्रांत संघचालक ने बताया कि संघ के कार्यकत्र्ता सामाजिक जागरण के काम में लगे हैं। गऊ सेवा के माध्यम से गाय के महत्त्व को जन-जन तक बताने तथा पंचगव्य के प्रयोग से होने वाले लाभों की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इस संदर्भ में इस वर्ष एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक देशभर में एक बड़ा कार्यक्रम होने वाला है। 

ग्राम विकास के माध्यम से लगभग हजारों गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास चल रहा है। जहां गांव के किसान जैविक खेती के माध्यम से लोगों को साफ-सुथरा अनाज, सब्जियां उपलब्ध करवा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अपनी जमीन को प्रदूषित होने से बचा भी रहे हैं। सामाजिक समरसता के माध्यम से समाज के हर व्यक्ति के मन में अपनत्व की भावना हो तथा आपस में भाईचारा हो। इसके लिये जमीनी स्तर पर कार्य हो रहा है। गांव में सबके लिये एक कुआं, एक पूजा घर तथा एक श्मशानघाट की व्यवस्था को समाज स्वीकार कर रहा है। किसी भी हालत में समाज के बंधुओं के साथ आपस में संघर्ष न हो तथा सब आपस में मिलजुल कर रहें इसके प्रयास भी हो रहे हैं। परिवार प्रबोधन के माध्यम से परिवारों को एक रखने का प्रयास हो रहा है। खंडित परिवार समाज के लिये अभिशाप हैं। अत: संयुक्त परिवार ही आदर्श परिवार हैं इसके लिये नियमित प्रयास हो रहा है। बेदी जी ने बताया कि इसके अतिरिक्त समय-समय पर आने वाली परिस्थितियों के लिये भी संघ के स्वयंसेवक तत्पर रहते हैं। उदाहरण के लिये चीनी वस्तुओं के विरुद्ध सारे देश में आन्दोलन किया गया जिसका एक बहुत बड़ा असर समाज पड़ा। उन्होंने कहा आज आवश्यकता है कि प्रबुद्धजन संघ के समर्थक बनने की बजाये संघ में आये, संघ को समझे तथा देश और समाज के काम में अपनी रूचि के अनुसार जुट जायें। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पंजाब प्रांत के प्रचार प्रमुख श्री रामगोपाल जी भी उपस्थित थे। 

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