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भीमराव अंबेडकर के संविधान को कोई बदल नहीं सकता: रमेशचन्द्र

Publish Date: April 15 2018 04:39:57pm

जालंधर(उत्तम हिन्दू न्यूज): बाबा साहिब भीमराव अंबेडकर जी ने विषपान करने के बावजूद दूसरों को अमृत वितरण किया। उन्होंने अपने ही लोगों के हाथों अपमान सहा, उसका प्रतिकार तो किया परंतु अपने ही बंधुओं के प्रति द्वेष नहीं पाला और उनके कल्याण की ही सोची। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख ने संघ कार्यालय पीली कोठी गोपाल नगर में  बाबा साहिब भीमराव अंबेडकर जयंती को समर्पित गोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। 

रामगोपाल ने कहा कि बाबा साहिब जैसे महान व्यक्तित्व को किसी वर्ग, संप्रदाय या क्षेत्र की परिधि में सीमित नहीं किया जा सकता। बाबा साहिब न केवल वंचित वर्ग उद्धारक बल्कि नारी हितों के हितैषी, उच्च कोटि के विधिवेता, महान अर्थशास्त्री, शिक्षाविद् थे और उनका दृष्टिकोण प्रखर राष्ट्रवादी था। उनके पंथांतरण की घोषणा करने के बाद बहुत से इस्लामिक व चर्च के प्रतिनिधियों ने उनसे अपने धर्मों में धर्मांतरण करने का प्रस्ताव पेश किया और कई तरह के प्रलोभन दिए। लेकिन डा. साहिब जानते थे कि इस्लाम या इसाईयत में धर्मांतरण अंतत: राष्ट्रांतरण साबित होता है और कालातीत के बाद इससे देश की एकता-अखण्डता प्रभावित होती है। इसीलिए उन्होंने तमाम प्रलोभनों को ठुकराते हुए बौद्ध पंथ में पंथांतरण किया जो भारत भूमि पर फला-फूला और भारतीय संस्कृति की खाद लेकर पल्लवित पौषित हुआ। उनका हिंदू धर्म छोडऩा अपने ही समाज से वंचितों को मिल रहे अपमान का आक्रोश मात्र था। गांधी जी के साथ पूना पैक्ट करके उन्होंने दलित वर्ग को हिंदू समाज से अलग करने की अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति को परास्त किया और वंचित वर्ग को धर्मच्युत होने से बचा लिया।

अपने संबोधन में गोष्ठी के मुख्य अतिथि व प्रसिद्ध सामाजिक व पूर्व राजदूत रमेशचन्द्र ने कहा कि बाबा साहिब अंबेदकर के जीवन का मूल्यांकन करते हुए उनके जीवन के हर पहलु की समीक्षा जरूरी है। उन जैसे महापुरुष को केवल किसी वर्ग विशेष के साथ जोडऩा उनके साथ न्याय नहीं होगा। उन्होंने विशेष जोर देकर कहा कि बाबा साहेब के बनाये संविधान के कारण ही भारत एक है और शक्तिशाली है । उन्होंने कहा कि विश्वास कीजिये इसे कोई बदल नही सकता। डी ए वी स्कूल विलगा के प्रिंसिपल रवि दत्त शर्मा जी ने गोष्ठी का समापन करते हुए कहा कि जातिवाद, छूआछूत विहीन व समरस समाज का निर्माण ही हमारी ओर से बाबा साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर पथिक सन्देश और युगबोध पत्रिका के बाबा साहेब के विशेषांक का विमोचन भी हुआ। संघ कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम में स्वयंसेवको के अतिरिक्त समाज के अनेको  गणमान्य व्यक्तियों ने बाबा साहेब को श्रद्धासुमन अर्पित किए। 
 

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