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सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को दी बड़ी राहत, नए संविधान का मसौदा मंजूर

Publish Date: August 09 2018 05:23:21pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): सर्वाेच्च अदालत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और राज्य क्रिकेट संघों को बड़ी राहत देते हुए गुरूवार को ‘एक राज्य एक मत’ के नियम को खारिज कर दिया। इसके अलावा लोढा समिति के भारतीय बोर्ड के लिए बनाए गए संविधान के मसौदे को भी कुछ सुधारों के साथ अपनी मंजूरी दे दी। सर्वाेच्च अदालत ने बीसीसीआई में संवैधानिक और आधारभूत सुधारों के लिए लोढा समिति का गठन किया था जिसने अदालत के सामने अपनी सिफारिशें रखी थीं। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बोर्ड के लिए तैयार किए गए संविधान के मसौदे को कुछ बदलावों के साथ मंजूरी दे दी।

अदालत ने साथ ही बीसीसीआई के राज्य सदस्यों को बड़ी राहत देते हुए एक राज्य एक मत के नियम को रद्द कर दिया है और मुंबई, सौराष्ट्र, वडोदरा और विदर्भ क्रिकेट संघों को स्थायी सदस्यता प्रदान कर दी है। मुख्य न्यायाधीश ने तमिलनाडु सोसायटी के रजिस्ट्रार जनरल को चार सप्ताह के भीतर नये संशोधित बीसीसीआई संविधान मसौदे को रिकार्ड करने के लिये निर्देश भी दिये हैं। खंडपीठ में न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूण भी शामिल थे। उन्होंने रेलवे, सेना और यूनिर्वसिटीज़ की स्थायी सदस्यता को भी बरकरार रखने का फैसला किया जिसे पहले सर्वाेच्च अदालत द्वारा गठित लोढा समिति की सिफारिश पर रद्द कर दिया गया था।

सर्वाेच्च अदालत ने बीसीसीआई के पदाधिकारियों के लिये ‘कूलिंग ऑफ’ या दो कार्यकालों के बीच में अंतर की समयावधि के नियम में भी बदलाव किये हैं। संशोधित नियम के अनुसार बोर्ड का कोई शीर्ष पदाधिकारी अब एक के बजाय लगातार दो कार्यकाल तक पद पर बना रह सकता है। अदालत ने साथ ही क्रिकेट संघों को आदेश दिये हैं कि वे 30 दिनों के भीतर बीसीसीआई के संविधान को लागू करें। इसके लिये अदालत ने स्वयं गठित प्रशासकों की समिति(सीओए) को भी निर्देश दिये हैं कि वह इस प्रक्रिया की निगरानी करे। राज्य संघों को नियम उल्लंघन करने की स्थिति में सज़ा के लिये भी चेताया गया है। उल्लेखनीय है कि पांच जुलाई को अपने फैसले में सभी राज्य क्रिकेट संघों को शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक लगायी थी। 


वहीं पिछली सुनवाई मेंं तमिलनाडु क्रिकेट संघ(टीएनसीए) ने बीसीसीआई एवं राज्य सघों के पदाधिकारियों के लिये कूलिंग ऑफ का विरोध किया था। टीएनसीए ने साथ ही आर एम लोढा समिति के पदाधिकारियों के लिये 70 वर्ष की आयु तक पद पर रहने की सिफारिश का भी विरोध किया था। हालांकि अदालत ने पदाधिकारियों के लिये 70 वर्ष की आयु निर्धारित करने के नियम को बरकरार रखा है। सर्वाेच्च अदालत ने इससे पहले बीसीसीआई के पदाधिकारियों और राज्य क्रिकेट संघों को भारतीय बोर्ड के नये संविधान के लिये अपनी सलाह देने के लिये भी कहा था जो लोढा समिति की सिफारिशों की दिशा में हों। लोढा समिति ने बीसीसीआई में आधारभूत ढांचें में बदलाव के लिये अपनी सिफारिशें अदालत के सामने रखी थीं जिनमें से पहले एक राज्य एक मत के नियम सहित अधिकतर पर अदालत ने अपनी सहमति जताई थी। हालांकि बाद में कई नियमों का विरोध हुआ जिसमें से एक राज्य एक मत नियम मुख्य था क्योंकि महाराष्ट्र राज्य के ही अकेले तीन क्रिकेट संघ हैं जिनकी टीमें रणजी सहित घरेलू टूर्नामेंटों में खेलती हैं। 
 
 

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