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कोटा में चम्बल नदी किनारे कई क्षेत्रों में पेयजल संकट

कोटा (उत्तम हिन्दू न्यूज): राजस्थान के कोटा में चम्बल नदी के किनारे बसे कई इलाके इन दिनों गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है और अधिकतम तापमाप भी 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। गर्मी में इन क्षेत्रों में पेयजल संकट बना हुआ और यह हालत तब है जब कोटा में संचालित दोनों जलशोधन संयंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ चल रहे हैं। त्यौहार एवं शादी के सीजन के कारण पेयजल की मांग भी बढ़ी है।

कोटा की अनुमानित 15 लाख की आबादी के पीने के पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए प्रतिदिन 300 मिलीयन लीटर पानी की आवश्यकता है ओर कोटा में अकेलगढ़ और सकतपुरा में स्थित जलशोधन संयंत्रों की कुल जल उत्पादन क्षमता 330 मिलियन लीटर प्रतिदिन की है जिसमें अकेलगढ़ के पुरानी संयंत्र की 200 मिलीयन लीटर और सकतपुरा के दूसरे संयंत्र की 130 मिलियन लीटर की क्षमता है लेकिन इसके बावजूद कोटा के छावनी, रामचंद्रपुरा, कोटडी, गोरधनपुरा जैसी सघन आबादी वाले क्षेत्रों में तो पिछले एक महीने से भी अधिक समय से गंभीर पेयजल संकट की स्थिति बताई जा रही है।

नये कोटा शहर सहित बारां, बूंदी रोड पर विकसित ज्यादातर बहुमंजिला इमारतों के रहवासियों को जलदाय विभाग पीने का पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। यहां के लोग की बिल्डर की ओर से खुदवाये गये ट्यूबवैल का पानी पीने की मजबूर है और ज्यादातर ट्यूबवेल का पानी पूरी तरह शुद्ध नहीं होता। कुछ ट्यूबवैल का पानी फ्लोराइड युक्त होने के कारण मानवीय स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। छावनी-रामचंद्रपुरा के कुछ इलाकों में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि जब कोटा नगर निगम को ट्रैक्टर टैंकर से पीने का पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। इसी इलाके के देवेश तिवारी और कुछ अन्य पार्षद जलदाय विभाग के शॉपिंग सेंटर स्थित विभागीय कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी की विधायक कल्पना देवी ने गत विधानसभा सत्र में इस मसले को बड़े जोर-शोर से उठाते हुए महिलाओं की देर रात को जाग कर पानी का जुगाड़ करने की व्यथा को व्यक्त किया था लेकिन हालात जस के तस है। नई धानमंडी में स्थित उच्चस्थ जलाशय विभागीय लापरवाही के कारण कई वर्षों से बंद पड़ा है।

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत ने कहा कि यह दुर्भाग्यजनक स्थिति है कि चंबल नदी से हम राज्य के कई पेयजल संकटग्रस्त इलाकों के लोगों के पीने की पानी की समस्या का निस्तारण कर सकते हैं। पूर्व में भी वाटर ट्रेन के जरिए भीलवाड़ा और अब जोधपुर संभाग के पाली में पानी भेजा जा रहा है। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन कोटा के लाखों लोगों के पीने के पानी की जरूरत को पूरा करना भी प्राथमिक में शामिल होना चाहिए। अभी कोटा में कम से कम तीन और मिनी वाटर फिल्टर प्लांट स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। सबसे पहले उम्मेदगंज में प्लांट बने ताकि बारां, कैथून रोड पर नव विकसित कॉलोनियों और बहुमंजिला इमारतों में रह रहे लोगों के पीने की पानी की जरूरतों को पूरा किया जा सके। कोटा नगर निगम की पूर्व उप महापौर सुनीता व्यास ने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान कोटा में कई जगह पाइप लाइन ही तोड़ दिए जाने से अथाह पेयजल उपलब्धता के बावजूद पेयजल संकट खड़ा किया जा रहा है। निर्माण कार्यों में लगी सरकारी एजेंसियों को ऐसी गलतियां करने से रोकने के लिए कड़ी चेतावनी दी जानी चाहिए।

कोटा नगर निगम (दक्षिण) के वार्ड संख्या 59 के पार्षद देवेश तिवारी ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि वह दर्जनों बार सघन आबादी क्षेत्र वाले छावनी-रामचंद्रपुरा जैसे इलाकों की पेयजल समस्या के निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों से लंबी बातचीत कर चुके हैं लेकिन उस समय तो अधिकारी तत्काल समस्या के समाधान का आश्वासन दे देते हैं, लेकिन यह समाधान अभी तक नहीं हो पा रहा है और अभी भी यहां ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जिन्हें अपने घरों में पेयजल जुटाने के लिए दूसरों के घरों पर निर्भर रहना पड़ता है। चंबल नदी के किनारे बसे किशोरपुरा क्षेत्र से तीन बार भारतीय जनता पार्टी के पार्षद रह चुके मोहम्मद यूसुफ कहते हैं कि चंबल नदी के किनारे बसे पुराने कोटा की कई बस्तियों के सामने नदी के रूप में अजस्त्र जल स्त्रोत उपलब्ध है, लेकिन वह सीधे नदी से तो पानी नहीं ले सकते। पीने के लिए तो नलें से मिलने वाला शोधित जल ही चाहिए जो मिल नहीं पा रहा है। उधर, शहर कांग्रेस अध्यक्ष रविंद्र त्यागी ने कहा कि जहां पीने के पानी का संकट है, उसके निस्तारण के उपाय किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को भी इस बारे में सूचित किया जा रहा है। सरकार भी समस्या के निदान के प्रति संकल्पित है।

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल की मंशा है कि कोटा के लोगों को चौबीसों घंटे पीने का पानी मिले। उनके पिछले कार्यकाल में सकतपुरा में कोटा को दूसरा नया जलशोधन संयंत्र मिला था जबकि इस कार्यकाल में नए कोटा शहर के श्रीनाथपुरम में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 50 मिलियन लीटर प्रतिदिन की जलशोधन क्षमता का तीसरा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है जो जल्दी ही बन कर तैयार भी हो जाएगा। इसी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कोटा में व्यापक पैमाने पर चल रहे कार्यों के दौरान पेयजल आपूर्ति करने वाली पाइपलाइनों टूट जाने से लाखों लीटर पानी सड़कों -नालियों में बह जाता है, इससे भी श्री धारीवाल की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

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