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बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने में बड़सर सिविल अस्पताल नाकाम

अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों सहित दो दर्जन से ज्यादा पद खाली –
डॉक्टरों के रहने के लिए बनाए जा रहे आलिशान कमरे –
मरीज व उनके तिमारदारों को बैठने तक नहीं है पर्याप्त सुविधा –
हमीरपुर/विशेष संवाददाता : प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के वायदे व दावे धरातल पर धराशाही हुए हैं। सरकारी अस्पतालों में चल रही विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित अन्य स्टॉफ की कमी ने सरकार व विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है। आलम यह है कि सरकारी अस्पताल मात्र रैफरल अस्पताल बनकर रह गए हैं और क्षेत्र की जनता स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निजी अस्पतालो मे धक्के खाने को मजबूर हो रही है। हालांकि अपनी इस अव्यवस्था व नाकामी पर पर्दा डालने के लिए सरकारी अस्पतालों में विभाग द्वारा मेडिकल कैपों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन क्षेत्र की जनता के लिए अस्पतालों में लगाए जा रहे ये मेडिकल कैंप जनता के लिए लॉलीपॉप से बढक़र कुछ खास साबित नहीं हो रहे हैं।
अगर बात जिला हमीरपुर के सरकारी अस्पतालों की करें तो वर्तमान में जिला के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल चरमरा गई है। इसके पीछे कारण यह है कि जिला के खंड स्तरीय सिविल अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने व इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं। इन अस्पतालों में केवल एमबीबीएस के सहारे ही काम चलाया जा रहा है जबकि आपत्कालीन स्थिति में लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था ही नहीं है। जिला हमीरपुर के सिविल अस्पताल बड़सर में तो एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के चलते यहां अपना इलाज करवाने पंहुचने वाले मरीज व उनके तिमारदार खुद को ठगा महसूस करने लगे हैं।
अस्पताल में न तो कोई मेडिसिन विशेषज्ञ है और न ही स्त्री रोग, शिशु रोग, हड्डी रोग व आई विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध है। इसके आलावा अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के दो दर्जन से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस अस्पताल में न कोई विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात हो और दो दर्जन से ज्यादा पद रिक्त चल रहे हो, उस अस्पताल मे मरीजों को कितनी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं।
यही हाल बड़सर के अन्य अस्पतालों भोटा व बिझड़ी का भी है। यहां भी स्टॉफ व अन्य व्यवस्थाओं की कमी के चलते मजबूरन लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है या फिर इसका बोझ जिला अस्पताल पर बढ़ रहा है, जहां जिला भर के लोग इलाज के लिए घंटो लाइनों में खड़े होने को मजबूर हो रहे हैं।

 300 से 400 के करीब रहती है ओपीडी
सिविल अस्पताल बड़सर में रोजाना 300 से 400 के करीब ओपीडी रहती है, लेकिन यहां मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों की ही नहीं बल्कि अन्य सुविधाओं का भी भारी टोटा है। अस्पताल के विस्तारिकरण का काम तो किया जा रहा है जिसमें 100 बिस्तरों के लिए भवन के निर्माण के साथ-साथ डाक्टरों के रहने के लिए कमरों का निर्माण तो करवाया जा रहा है लेकिन बिडंबना यह है कि इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर व पर्याप्त स्टॉफ नहीं है और न ही मरीजों के तिमारदारों को बैठने की कोई उचित व्यवस्था है। जिस अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की बात सरकार व विभाग करता है, वहां पर सप्ताह में मात्र एक दिन अल्ट्रासॉउन्ड होते हैं, इसके लिए भी डेपुटेशन पर रेडियोलाजिस्ट से काम चलाया जा रहा है।

ऑक्सीजन प्लांट के बावजूद सिलेंडरों के सहारे हो रहा मरीजों का इलाज
यहीं नहीं अस्पताल में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोरोना काल में लाखों रुपए खर्च कर ऑक्सीजन प्लांट तो लगाया गया, लेकिन आज भी ऑक्सीजन सिलेंडरों के सहारे मरीजों का इलाज हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिला में बैठे आला अधिकारी बड़सर अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की बात को ही नकार रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बिझड़ी ताल स्टेडियम से बड़सर अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन किया था। वहीं, खंड स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारी इस प्लांट के न चलने के पीछे तकनीशियन की उपलब्धता न होना बता रहे हैं।

अस्पतालों में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का टोटा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर के सरकारी अस्पतालों में दर्जनों विशेषज्ञ डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद रिक्त होने से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिला में अस्पतालों के दर्जे तो बढ़ाये गए है लेकिन यहां लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को ही नहीं बल्कि अस्पतालों में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का भी भारी टोटा है, जिससे हमीरपुर की जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। हालांकि इन अव्यवस्थाओं पर अस्पतालों में मेडिकल कैम्पों का आयोजन कर पर्दा डालने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है लेकिन ये कैम्प भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जनता के लिए लॉलीपॉप साबित हो रहे हैं।

  • प्रदेश की जनता को सरकार की तरफ से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कारवाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिन अस्पतालों में स्टॉफ व डाक्टरों के पद खाली हैं, उन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बड़सर अस्पताल में भी शीघ्र विशेषज्ञ डाक्टरों व स्टॉफ के पद भरें जाएंगे। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिए सिविल अस्पताल को 100 बिस्तर का बनाया जा रहा है।
    – इंद्रदत्त लखनपाल, विधायक, बड़सर विस।
  • जिला के अस्पतालों में रिक्त चल रहे पदों के बारे में हर महीने रिपोर्ट सरकार को भेजी जाती है। रिक्त पदों को कब तक भरा जाएगा इसके बारे मे सरकार ही बता सकती है। बड़सर में कोई ऑक्सीजन प्लांट स्थापित नहीं है।
    – आरके अग्निहोत्री, मुख्य चिकित्साधिकारी हमीरपुर।
  • सिविल अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट को अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है, क्योंकि प्लांट को चलाने के लिए तकनीशियन नहीं मिल पाया है। अभी तक सिलेंडरों के माध्यम से ही मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
     – डा. बृजेश शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी, बड़सर।
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