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ईशनिंदा

राज्यसभा में शून्यकाल के समय भाजपा के सांसद अशोक वाजपेयी ने देश में ईशनिंदा के बढ़ते मामलों को देखते हुए देश में ईशनिंदा कानून बनाने की मांग की। अपनी मांग के समर्थन में अशोक वाजपेयी ने कहा कि 100 से अधिक देशों में आस्था का अपमान करने वालों के लिए ईशनिंदा कानून है। उन्होंने कहा कि भारत में सवा सौ करोड़ हिन्दू हैं और वह उदारवादी और सहिष्णु होते हैं लेकिन आए दिन उनकी आस्था पर चोट की घटनाएं देखने को मिलती हैं। वाजपेयी ने कहा कि ऐसी घटनाएं कई दफा सामने आई हैं जिनमें दूसरे धर्मावलंबी हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हैं, लेख लिखते हैं और चित्र तक बनाते हैं जिनसे हिन्दू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचती है लेकिन उनके खिलाफ समुचित दंड का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर विषय बताया तथा इस क्रम में राजस्थान की एक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मेरी अपील होगी कि देश में ईशनिंदा का कानून बने। धर्म, धर्म के प्रतीकों, धर्म के खिलाफ टिप्पणी,. साहित्य या चित्र जैसी कार्रवाई के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का प्रावधान हो।
अशोक वाजपेयी ने जो मांग की है वह उचित व समयानुसार ही है। देश के बहुमत हिन्दू समाज की भावनाओं को आहत करने से कोई भी झिझकता नहीं। क्योंकि उसे एहसास है कि हिन्दू कानून को मानने वाला, इसकी प्रतिक्रिया उस तरह की हिंसात्मक नहीं होगी जैसे अन्य धर्मों विशेषतया इस्लाम को मानने वालों की होती है।
विश्व में अधिकतर ईसाई व इस्लामिक देशों में ईशनिंदा कानून बने हुए हैं और उनका सख्ती से पालन भी होता है। पाकिस्तान जैसे देशों में तो इस कानून का अल्पसंख्यकों के प्रति दुरुपयोग भी होता है। आये दिन ईशनिंदा के नाम पर अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्य की भीड़ द्वारा हत्या के मामले भी सामने आते हैं। शायद भारत ही एक ऐसा देश है जहां बहुमत हिन्दू समुदाय की भावनाओं को आहत करना रोजमर्रा की बात बन गई है।
हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर हिन्दू परंपराओं और रीति-रिवाज के प्रति अपशब्द कहना या निंदा करना एक साधारण बात बन गई है। उसकी प्रतिक्रिया में हिन्दुओं का कोई व्यक्ति विशेष बोलता है तो उसको जान से मारने की धमकियां मिलने लगती हैं और कई मामलों में हत्या भी कर दी गई। अशोक वाजपेयी की मांग में दम है और उचित भी है। क्योंकि जब देश में ईशनिंदा कानून बन जाएगा तो सबको अपने किये की सजा कानून अनुसार भुगतनी पड़ेगी। ईशनिंदा को लेकर आज की स्थिति तो जंगल राज जैसी है जो जुनूनी है और ताकतवर है। वह कानून को अपने हाथ में लेने में डरता नहीं और अपने नापाक इरादों को अंजाम दे देता है। क्योंकि उसे पता है कि देश में कोई सख्त ईशनिंदा को लेकर कानून नहीं है।
संविधान अनुसार सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए पर अपमान करने के मामले में ईशनिंदा कानून न होने के कारण स्थिति असंतुलित है। संतुलन बनाने के लिए ईशनिंदा कानून बनाने की आवश्यकता है। लेकिन इस का दुरुपयोग न हो यह बात भी सुनिश्चित करनी होगी।

झुकते नवजोत सिद्धू
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू

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