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साइबर क्राइम करने वाले खोज लेते हैं ठगी के ने नए-नए ढंग

जालंधर/अनिल डोगरा
भोले-भाले लोगों के एटीएम कार्ड बदल कर ठगी के मामले आम हो गए हैं और अब साइबर क्राइम आपरेटरों ने अपना जाल फैलाना और तेज कर दिया है। जो अलग-अलग ढंग से लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं।
साइबर क्राइम करने वाले ठग अब बैंक के कस्टमर केयर के नाम पर फोन करके जानकारी हासिल करता है, कॉल करते समय आधार कार्ड सहित अन्य जानकारियां लेकर फोन बंद कर दिया जाता है। उस समय उपभोक्ता से किसी तरह का ओटीपी नंबर नहीं मांगा जाता। जिससे उपभोक्ता को यकीन हो जाता है कि उसे बैंक से ही फोन आया होगा। इसके बाद उक्त ठग कुछ दिन बाद दोबारा फोन करके बैंक की तरफ से इंश्योरेंस किए जाने का कहकर कुछ और जानकारियां जुटाने में कामयाब हो जाता है, दूसरी कॉल के वक्त भी ओटीपी नहीं मांगा जाता।
वास्तविक खेल दोनों कॉल करने के बाद होता है जिसके बारे में उपभोक्ता ने सोचा भी नही होता है कि उसके साथ इस तरह से भी ठगी हो सकती है। उपभोक्ता के मोबाइल फोन पर 400-500 रुपए का रिचार्ज होता है और उसे समझ नहीं आता कि यह रिचार्ज कैसे हो गया। युवती फोन पर कॉल करके अपनी मजबूरी बताती है कि उससे गलती से रिचार्ज हो गया है। जिस कारण उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उसका वेतन बहुत कम है, वह गरीब है, ऐसी बातें करके वह युवती अपने शिकार व्यक्ति को अपने जाल में फंसाने के बाद एक मैसेज करती है ओटीपी की मांग करती है। ओटीपी लेने के बाद शिकार खाली होना शुरू हो जाता है।

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