Sunday, February 25, 2024
ई पेपर
Sunday, February 25, 2024
Home » मथुरा का विकास

मथुरा का विकास

श्रीकृष्ण की भक्त मीराबाई की 525वीं जयंती पर मथुरा में आयोजित मीराबाई जन्मोत्सव को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत के पुनरुत्थान के पीछे श्रीकृष्ण का ही आशीर्वाद है। मथुरा भक्ति आंदोलन का केंद्र रहा है। यह क्षेत्र कान्हा की लीलाओं से जुड़ा है। हमारा प्रयास है कि इस पूरे इलाके का विकास करें। उन्होंने कहा, ब्रज रज महोत्सव देश की विकास की धारा में अपना प्रकाश बिखेर रहा है। उन्होंने कहा, आजादी के अमृतकाल में देश दासता की मनोवृत्ति से बाहर आ गया है और अपनी विरासत पर गर्व की भावना से आगे बढ़ रहा है। ब्रज रज उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो लोग भारत को उसकी पहचान से काटना चाहते हैं उन्होंने ब्रज भूमि को विकास से अछूता रखा।

देश गुलामी की मानसिकता से बाहर आया है। मथुरा और ब्रज भूमि विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहेंगे। वह दिन दूर नहीं जब ब्रज में भी भगवान के दर्शन और दिव्यता के साथ होंगे। 24 कोस का यह ब्रजमंडल भी यू.पी. और राजस्थान को मिलकर बनता है। भारत सरकार का प्रयास है कि अलग-अलग राज्य सरकारों के साथ मिलकर ब्रज क्षेत्र का विकास किया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान के चुनाव मैदान से इस भक्ति वातावरण में आया हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां वही आते हैं जिन्हें श्रीकृष्ण और श्रीजी बुलाते हैं। यह कोई साधारण धरती नहीं है। ब्रज प्रेम का साक्षात अवतार है। यह ब्रज ही है जिसकी रज भी पूरे संसार में पूजनीय है। यहां के कण-कण में कृष्ण हैं। विश्व की सभी तीर्थ यात्राओं का जो लाभ होता है उससे भी अधिक लाभ मथुरा और ब्रज की यात्रा से मिल जाता है।

हेमा मालिनी सांसद तो हैं लेकिन वह ब्रज में रम गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम वर्तमान काल की चुनौतियों को देखेंगे तो मीराबाई अपने मूल्यों से जुड़े रहने की सीख देती हैं। मथुरा तो भक्ति आंदोलन की विभिन्न धाराओं का केंद्र रहा है। कितने ही संत यहां आए जिन्होंने भारतीय समाज में नई चेतना फूंकी। ब्रज रज उत्सव में शिरकत करने पहुंचे पी.एम. नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के सी.एम. योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने संत मीराबाई की 525वीं जयंती के अवसर पर संयुक्त रूप से मीराबाई पर डाक टिकट और 525 रुपए का सिक्का जारी किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रजवासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नए भारत का वैश्विक मंच पर सम्मान बढ़ा है। भारत की सीमाएं सुरक्षित हुई हैं। साढ़े नौ वर्षों में हर समस्या को एक मार्ग दिखाकर समाधान तक पहुंचाया है। नए भारत के रूप में एक विकसित भारत की रूपरेखा प्रस्तुत की है। नया भारत अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करता है। काशी विश्वनाथ धाम आज पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंग अनुसार, द्वापर युग की बात है, दैत्यों के दल ने घमंडी राजाओं का रूप धारण कर अपने भारी भार से पृथ्वी को आक्रान्त कर रखा था। उससे त्राण पाने के लिये वह ब्रह्माजी की शरण में गई। वहां उसने अपनी पूरी कष्ट कथा कह सुनाई। ब्रह्माजी ने बड़ी सहानुभूति के साथ उसकी दु:ख गाथा सुनी। उसके बाद वे भगवान् शंकर, स्वर्ग के अन्यान्य देवता तथा गोरूप धारिणी पृथ्वी को साथ लेकर क्षीरसागर के तट पर गये। वहां पहुंचकर ब्रह्मा आदि देवताओं ने पुरुषसूक्त के द्वारा परमपुरुष सर्वान्तर्यामी प्रभु की स्तुति की। स्तुति करते-करते ब्रह्माजी समाधिस्थ हो गये। उन्होंने समाधि-अवस्था में ही आकाशवाणी सुनी और देवताओं से कहा-‘देवगण! भगवान् को पृथ्वी के कष्ट का पहले से ही पता है। वे भूभार हरण करने के लिए भूतल पर अवतीर्ण होंगे। अत: उनकी लीला में सहयोग करने के लिए तुम लोग भी अपनी स्त्रियों सहित यदुकुल में जन्म ग्रहण करो। वसुदेव जी के घर स्वयं भगवान् पुरुषोत्तम प्रकट होंगे। उनकी और उनकी प्रियतमा श्रीराधा की सेवा के लिए देवाङ्गनाएं जन्म ग्रहण करें। स्वयंप्रकाश भगवान् शेष भी उनसे पहले ही उनके बड़े भाई के रूप में अवतार ग्रहण करेंगे। भगवान् की लीला के कार्य सम्पन्न करने के लिए भगवती योग माया भी अंश रूप से अवतीर्ण होंगी।’ देवताओं से ऐसा कहकर और पृथ्वी को सान्त्वना दे ब्रह्माजी अपने धाम को चले गये।\

पृथ्वी के कष्टों को हरणे हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में देवकी और वासुदेव के यहां जन्म लिया था इसलिए मथुरा का भी हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों का उतना ही महत्व है जितना भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या का स्वतंत्रता मिलने के बाद सत्ता में आये लोगों का पहला काम तो इन पावन स्थलियों के महत्व को समझते हुए इन्हें संभालने व संवारने का होना चाहिए था, क्योंकि यह दोनों स्थान राष्ट्र संस्कृति के केंद्र बिन्दु हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि तुष्टिकरण की नीति सत्ताधारियों के दिलो-दिमाग पर छाई हुई थी।

प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि अयोध्या के बाद मथुरा भी अब दूर नहीं दर्शाता है कि मथुरा का विकास अब प्रदेश और देश दोनों सरकारों की प्राथमिकता है। यह एक शुभ संदेश और संकेत है। यह कार्य जितना जल्दी हो उतना बेहतर होगा, क्योंकि राम और कृष्ण देश की पहचान के साथ-साथ राष्ट्रीय संस्कृति के केंद्र बिन्दु हैं। इनके जीवन की लीलायें और इनके कहे वचन मानव को प्रेरणा देते हैं और रहेंगे। प्रदेश और देश की सरकारों को मथुरा विकास के लिए योजना बनाने के लिए बहुत-बहुत बधाई।

झुकते नवजोत सिद्धू

– इरविन खन्ना (मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू)  

 
GNI -Webinar

@2022 – All Rights Reserved | Designed and Developed by Sortd