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होटल ग्रैंड की खोदाई के कारण गुरु नानक कालोनी के मकानों में आई दरारें

अमृतसर/दीपक मेहरा
रेलवे स्टेशन के पास होटल ग्रैंड की खोदाई के कारण गुरु नानक कालोनी के मकान नंबर 107, 108, 109, 110, 111, 112, 113 व 114 में दरारें आ गईं। इन दरारों के कारण हुए नुकसान के चलते इन घरों के लोग गली, पार्क और किराए के मकानों में रहने के लिए मजबूर हैं। इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से जांच का दौर जारी है। पीडि़त लोगों का रोजमर्रा जीवन भी बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है, क्योंकि मौसम की करवट को लेकर वे हर वक्त चिता में रहते हैं कि न जाने अचानक कब मौसम खराब हो गया, तो वह अपने परिवारों को लेकर कहां जाएंगे। मकान नंबर 108 के मालिक पंकज जुनेजा एक ट्रांसपोर्टर हैं। परिवार के तीन सदस्यों संग रहते हैं, जिनके मकान में आई दरारों से पारिवारिक सदस्य दहशत में हैं। भले ही फ्रंट साइड वाली जगह पर नुकसान कम है, मगर मकान की पिछली तरफ जाने से परिवार डरता है, क्योंकि निर्माणाधीन होटल की बेसमेंट के बिल्कुल साथ ही उनके मकान का पिछला हिस्सा लगता है।
मकान नंबर 109 के मालिक कमलजीत सिंह खैहरा अपने परिवार के पांच सदस्यों के साथ रह रहे हैं। 12 मई को हुई घटना के बाद आज तक उनमें दहशत का माहौल है। वह डर के कारण अपने मकान के भीतर नहीं जाते हैं, क्योंकि मकान में आई दरारें देखकर डर लगता है। बस प्रशासन से मिलने वाली मदद का इंतजार है।
मकान नंबर 110 के मालिक शमशेर सिंह कारोबार करते थे, जोकि अब अधिक उम्र होने की वजह से घर ही रहते हैं। उनके परिवार में ६ सदस्यों में एक बेटा सिमरनप्रीत सिंह प्राइवेट नौकरी करता है, जिसकी कमाई के साथ घर चलता है। अब उसे भी काम के साथ-साथ मकान के नुकसान की भरपाई के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है। घर में आई दरार ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं।
मकान नंबर 111 की मालिक डा. उमा अरोड़ा ने बताया कि उनके पति डा. बीआर अरोड़ा प्राइवेट नौकरी करते हैं। रोजमर्रा जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है, क्योंकि 12 मई की घटना के बाद उन्हें मकान की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंता रहती है। उनके बूढ़े मां-बाप सहित एक बेटा है जो 11वीं कक्षा में मेडिकल की पढ़ाई करता है। उसे घर में पढऩे के बजाय लाइब्रेरी में जाना पड़ रहा है।
मकान नंबर 112 के मालिक श्रवण कुमार कोहली अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। घटना वाले दिन से लेकर आज तक वह तनाव में चल रहे हैं, क्योंकि उनका कारोबार प्रभावित हुआ है। वह कोचिंग देने का काम करते हैं और जिस दिन घटना घटी उस दिन भी उनके घर में बच्चे कोचिंग ले रहे थे। उसके बाद वह बेघर हो गए हैं। पहले कोरोना महामारी में मारा, अब मकानों के नुकसान ने मारा है।
मकान नंबर 113 व 114 के मालिक करणबीर सिंह ने बताया कि उनका संयुक्त परिवार है। इसमें 12 सदस्य रहते हैं। उन्हें बिजनेस के चलते दूसरे स्थानों पर भी जाना पड़ता है, मगर अब घटना के बाद वह अपना घर छोडक़र नहीं जा पा रहे। मकानों के साथ ही साथ काम दोनों ही प्रभावित हुए हैं। अब यही चिंता बनी रहती है कि खुले आसमान से वह घरों को कब जाएंगे।

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