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किसान आंदोलन-2

किसान संगठन एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों पर दर्ज केस वापस लेने समेत अन्य मांगों को लेकर 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ मार्च की तैयारी कर रहे हैं। किसान गांव-गांव जाकर मुनादी करवा रहे हैं। घर-घर जाकर आंदोलन के लिए राशन तथा जरूरी फंड इकट्ठा कर रहे हैं। यह हाल पंजाब के कई गांवों का है। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर के जनरल सचिव रेशम सिंह यात्री अनुसार उनकी ओर से 6 महीने का राशन हर ट्रॉली के साथ रखा जाएगा। यह अपील भी गई कि प्रत्येक घर का एक मेंबर मोर्चे में जरूर शामिल हो। बठिंडा से ही कम से कम 500 ट्रैक्टर ट्रालियों, पिकअप गाड़ी तथा निजी वाहनों में किसान, नौजवान, बुजुर्ग तथा महिलाएं दिल्ली कूच करेंगी। किसानों का कहना है कि वे अपने साथ ही गैस स्टोव, सिलेंडर, मैट्रेस, कपड़े तिरपाल, लंगर का राशन जैसे आटा, नमक, चीनी, चायपत्ती, दालें आदि ले जा रहे हैं। अपनी मांगों को पूरा करवाकर ही लौटेंगे। चाहे किसानों के रास्तों में सरकार कितने रोड़े अटकाए, हर हालत में दिल्ली पहुंचकर ही रहेंगे। किसानों के अनुसार उन्होंने आत्मरक्षा के लिए भी सुरक्षा प्रबंध किए हैं। ट्रैक्टरों के साथ ऐसी चीजें भी हैं जिनसे अवरोध हटाए जा सके।

किसानों के 13 फरवरी के दिल्ली कूच को रोकने लिए अम्बाला में पंजाब व हरियाणा के बीच बने शंभू बॉर्डर को सीमेंट के बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया है। बैरिकेड्स के बीच कीलें लगाकर बजरी और सीमेंट डाला गया है। घग्गर नदी पर बने पुल को भी बंद कर दिया है। नदी के अंदर खुदाई की गई है, ताकि किसान ट्रैक्टरों से उससे होकर न निकल सकें। फतेहाबाद में सडक़ों पर लोहे की कीलें लगा दी गई हैं। अम्बाला में सीआरपीएफ और एआरएफ की 12 टुकडिय़ां भी बुलाई गई हैं। पंजाब के पटियाला से अम्बाला आने-जाने वाले रोड का रूट डायवर्ट कर दिया गया है। संगरूर में खनौरी बॉर्डर पर शनिवार को हरियाणा जाने वाला नेशनल हाईवे एक साइड से बंद कर दिया गया। हरियाणा में करीब 150 नाके लगा दिए गए हैं। सोनीपत, झज्जर, पंचकूला, अम्बाला, कैथल, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद में धारा-144 लागू हो चुकी है। 11 फरवरी की सुबह 6 बजे से 13 फरवरी के रात 12 बजे तक के लिए 7 जिलों (अम्बाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा) में मोबाइल इंटरनेट, बल्क एसएमएस और डोंगल सेवाएं बंद की गई हैं। इस बीच, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय 12 फरवरी को एक बार फिर चंडीगढ़ जाकर किसान नेताओं से बातचीत करेंगे।

फतेहाबाद में रतिया, जाखल और टोहाना स्थित बॉर्डर एरिया के सभी मुख्य मार्गों को 6 लेयर सुरक्षा के साथ बंद कर दिया। इसके चलते मुख्य रास्तों से जिले का पंजाब से संपर्क कट गया है। रतिया, टोहाना में रोडवेज बसों का आवागमन बंद हो गया है। सोनीपत में कुंडली और बहादुरगढ़ में टिकरी बॉर्डर को भी सील करने की तैयारी है। यहां सीमेंट के बेरिकेड्स भी पहुंच गए हैं। इस बीच किसान नेताओं की धरपकड़ शुरू हो गई है। नेताओं को नजरबंद करने के लिए पुलिस उनके घर दबिश दे रही है। वहीं, पंजाब के किसान संगठनों ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी है कि 13 फरवरी को धक्केशाही की तो 16 को दिल्ली कूच करेंगे। सडक़ें, ट्रेनें और टोल बंद करेंगे।

किसान संगठन और सरकार जिस तरह की तैयारियां कर रहे हैं, इससे आंदोलन का नहीं, बल्कि आपसी युद्ध होने का एहसास होता है, जैसे दोनों वर्गों ने आर-पार की लड़ाई लडऩी है। इस तरह की तैयारियों के बावजूद भी पिछले आंदोलन की तरह किसान दिल्ली पहुंचने में सफल हो सकते हैं। लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार टकराव की स्थिति को टालने की हर संभव कोशिश करेगी। किसान हर जोखिम उठाकर कूच को तथा आंदोलन को सफल करने का प्रयास करेंगे, क्योंकि किसान संगठनों को भी एहसास है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के कारण सरकार टकराव की राह पर नहीं चलेगी।

मान लेते हैं कि किसान दिल्ली पहुंच जाते हैं और रास्ते बंद करने में भी सफल हो जाते हैं, इसका क्षणिक नुकसान तो हरियाणा व केन्द्र सरकार को होगा, लेकिन पंजाब को स्थाई नुकसान का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि शेष देश में तो कामकाज शांतमय ढंग से चलता रहेगा। केवल पंजाब वासियों को ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। आंदोलन का आधार पंजाब ही बनेगा। आंदोलन कारण पंजाब की रोजमर्रा का जीवन तो प्रभावित होगा ही साथ में पंजाब में निवेश करने वाले भी पीछे हट जाएंगे।

पंजाब अगर उद्योगिक उन्नति नहीं करता तो इसकी आर्थिक स्थिति पर भी कुप्रभाव पड़ेगा और बेरोजगारी भी बढ़ेगी। रोजगार ढूंढने के लिए पंजाब के युवा को देश के अन्य भागों या फिर कनाडा, आस्ट्रेलिया तथा अन्य देशों को प्रवास करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
 
बेरोजगारी बढऩे से अपराध और नशा तस्करी भी बढ़ेगी। पंजाब सीमावर्ती प्रदेश है। कृषि उत्पाद चरम सीमा पर पहुंच चुका है। व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देकर ही पंजाब की आर्थिक स्थिति को ठीक किया जा सकता है, लेकिन किसान आंदोलन के कारण ऐसी स्थिति बनती जा रही है कि बाहर से आकर निवेश करने में निवेशक डरने लगेंगे। यह स्थिति पंजाब के लिए हानिकारक है। इस बात को किसान संगठन को समझते हुए संवाद द्वारा ही समस्याओं का समाधान ढूंढने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पंजाब से 1966 में अलग हुआ हरियाणा का विकास और इसकी आर्थिक मजबूती का मूल कारण राजनीतिक स्थिरता ही है। वहां के किसान भी परेशानियों को झेल रहे हैं, लेकिन प्रदेशहित को सम्मुख रख प्रदेश में शांति बनाए हुए है। पंजाब के किसान संगठनों को भी पंजाब हित को सम्मुख रखकर अपने दिल्ली कूच और धरना देने पर पुन: विचार करना चाहिए।

सरकार को किसानों की कृषि संबंधी उचित मांगों के प्रति गंभीरता से विचार कर हल ढूंढना चाहिए, टकराव किसी के हित में नहीं। 

झुकते नवजोत सिद्धू

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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