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अलगाववादियों और आतंकियों को संदेश

कश्मीर घाटी में आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों के लिए और आतंक फैलाने के लिए धन देने के दोषी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के यासीन मलिक को न्यायालय ने आखिरी दम तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष एनआइए न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने यासीन मलिक को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की विभिन्न धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मलिक को आतंकी गतिविधियों के लिए उम्रकैद व भारत के खिलाफ युद्ध छेडऩे के लिए भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 10 लाख 75 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। अदालत ने 19 मई को मलिक को दोषी करार दिया था। 2019 में एनआइए ने उसे गिरफ्तार किया था, तब से वह जेल में है। बहस के दौरान एनआइए ने कोर्ट को बताया कि यासीन घाटी से कश्मीरी हिन्दुओं के पलायन के लिए जिम्मेदार है। उसने पाकिस्तानी संगठनों की मदद से धन जुटाकर पत्थरबाजी और आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। मलिक की मासिक आय 50 हजार रुपए है। घाटी में उसके नाम पर जमीन भी है। मलिक के परिवार में 12 सदस्य हैं। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआइए) ने मलिक को 2019 की शुरुआत में 2017 में दर्ज आतंक के वित्तपोषण संबंधी मामले में गिरफ्तार किया था। 1988 में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ से जुडऩे के कुछ दिनों बाद ही वह पाकिस्तान चला गया। वहां प्रशिक्षण लेने के बाद 1989 में वह वापस भारत आया। इसके बाद वह गैर मुस्लिमों की हत्या करने लगा। आठ दिसंबर 1989 को देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण हो गया। उस वक्त मुफ्ती मोहम्मद सईद दिल्ली में अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। इस अपहरण कांड का मास्टरमाइंड अशफाक वानी था। कहा जाता था कि यह कांड यासीन मलिक के इशारे पर ही हुआ था। इसमें शामिल सारे आतंकवादी जेकेएलएफ से ही जुड़े थे। टाडा कोर्ट ने इस मामले में यासीन मलिक, अशफाक वानी, जावेद मीर, मोहम्मद सलीम, याकूब पंडित और अमानतुल्लाह खान को आरोपी बनाया। 1990 में सुरक्षाबल के जवानों ने अशफाक वानी को मार गिराया था।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा की कोई जगह नहीं है। यह बात यासीन मलिक को न्यायालय द्वारा दी सजा से स्पष्ट है। लेकिन पाकिस्तान सरकार व समाज द्वारा मलिक को मिली सजा पर दी प्रतिक्रिया और उसी दिन पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा बडगाम जिले के हशरू में टी.वी. कलाकार अमरीन की उसके घर में घुसकर गोली मारने की घटना से स्पष्ट है कि पाकिस्तान व उससे संरक्षण व समर्थन पाने वाले और पाकिस्तान से आये आतंकी अपने नापाक इरादों से टलने वाले नहीं हैं।
घाटी में जिस तरह कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट व टी.वी. कलाकार आमीन की हत्या की गई है, वह आतंकियों की हताशा को ही दर्शाता है। घाटी में अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां जो सकारात्मक परिवर्तन आये हैं उनको पाकिस्तान समर्थित अलगाववादी और आतंकी रोकने को कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह असफल ही रहेंगे, क्योंकि भारत आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक शक्ति के रूप में पहचान बना चुका है। आतंकी व उनको समर्थन देने वाले बहुत पीछे रह चुके हैं। तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि भारत विरोधी शक्तियां आतंकियों को समर्थन व संरक्षण देना जारी रखेगी। हमें समझना होगा कि आतंकवाद विरुद्ध लड़ाई अभी जारी है और अभी सतर्क रहना होगा। लापरवाही घातक साबित हो सकती है।

झुकते नवजोत सिद्धू

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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