Wednesday, February 28, 2024
ई पेपर
Wednesday, February 28, 2024
Home » बैक कार्रवाई तेजी से करें तो रुक सकती है ऑनलाइन ठगी : एडीजीपी

बैक कार्रवाई तेजी से करें तो रुक सकती है ऑनलाइन ठगी : एडीजीपी

चंडीगढ़, धरणी- प्रदेश में एडीजीपी साइबर की जि़म्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ अधिकारी ओपी सिंह का कहना है कि बैंकों को ऑनलाइन ठगी के प्रति अपनी बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली को तुरंत मजबूत करने की आवश्यकता है। अक्सर देखा गया है कि अधिकतर मामलों में, पीडि़तों ने साइबर अपराध की रिपोर्ट करने में औसतन 14 घंटे लगाए और कभी-कभी तो 38 घंटे तक, जिससे रिकवरी की संभावना कमजोर हो जाती है, क्योंकि ठग जल्दी से जल्दी ठगी गई राशि को फर्जी बैंक खातों में भेज देते हैं। हरियाणा पुलिस की साइबर क्राइम एजैंसी द्वारा किए गए विश्लेषण में पता चला है कि जब लोग साइबर ठगी की रिपोर्ट हेल्पलाइन 1930 पर करते हैं, तब तक ठगी को 14 घंटे से अधिक का समय बीत गया होता है, और बैंकों की धीमी प्रतिक्रिया के कारण ठगी गई राशि को ब्लॉक करने में 5-11 घंटे तक की देरी हो जाती है। पुलिस द्वारा साझा की गई एक्सक्लूसिव जानकारी से इस बात का पता चलता है कि पुलिस ने 20 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2024 तक दर्ज साइबर ठगी की सभी शिकायतों का विश्लेषण किया। इस अवधि में, बैंकों को तुरंत कार्रवाई करने के लिए 26.8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले रिपोर्ट किए गए थे। इसमें से केवल 6.73 करोड़ रुपये को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया गया, इसका मतलब है कि पुलिस द्वारा रिपोर्ट की गई राशि का 75 प्रतिशत बैंकों की देरी के कारण ब्लॉक नहीं किया जा सका।

*छोटी-छोटी ट्रांसक्शन से फज़ऱ्ी खातों में ट्रांसफर करते हैं ठग- एडीजीपी साइबर ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि डेटा विश्लेषण से यह खुलासा होता है कि पुलिस ने पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करने के बाद बैंकों को तुरंत अलर्ट भेजा, लेकिन इसके बाद बैंकों ने कार्रवाई करने में करीब 5-11 घंटे लगा दिए जिसका नुक्सान ये हुए कि उस समय तक, ठगी गई राशि को ठगों ने फर्जी खातों में भेजकर एटीएम से या तो नकदी के रूप में निकाल लिया गया या शॉपिंग के लिए इस्तेमाल कर लिया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि “शिकायत के पहले स्तर पर बैंकों ने कार्रवाई करने में पांच घंटे लगाए, वहीं जब ठगों ने धनराशि को अगले बैंक में भेजा तो इसमें बैंकों को प्रतिक्रिया करने में 11 घंटे लगे। डेटा विश्लेषण से साफ-साफ पता चलता है कि जहाँ पुलिस को साइबर ठगी की शिकायत बैंकों तक पहुंचाने में औसतन आठ मिनट लगते हैं वहीं बैंक के नोडल अधिकारी भेजे गये अलर्ट पर कार्रवाई करने में काफी समय लेते हैं। आगे उन्होंने बताया कि अधिकांश शिकायतों में, पीडि़तों ने साइबर अपराध की रिपोर्ट करने में औसतन 14 घंटे लगाए, और कभी-कभी 38 घंटे तक, जिससे रिकवरी की संभावना कमजोर हो गई, क्योंकि साइबर ठग बिना देरी किए फर्जी बैंक खातों में धन को जल्दी से जल्दी स्थानांतरित कर देते हैं।

GNI -Webinar

@2022 – All Rights Reserved | Designed and Developed by Sortd