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पिछले साल की तुलना में दिवाली पर पंजाब का एक्यूआई 22.8 प्रतिशत सुधरा

मान सरकार के निरंतर प्रयासों से पंजाब के पानी, हवा और मिट्टी के लिए अच्छे परिणाम आ रहे हैं : जगतार संघेड़ा –
बोले, पराली जलाने की 70 प्रतिशत कम घटनाएं मान सरकार के अच्छे प्रबंधन, किसान समर्थक और पर्यावरण अनुकूल कदमों का परिणाम –
चंडीगढ़/विज : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने मंगलवार को दिवाली पर भी पंजाब में एक्यूआई को मध्यम बनाए रखने में सफल रहने के लिए राज्य की मान सरकार की सराहना की। दिवाली पर पंजाब में (12 नवंबर को सुबह 7 बजे से 13 नवंबर को सुबह 6 बजे तक) औसत एक्यूआई 207 दर्ज किया गया जो पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर था।
मंगलवार को चंडीगढ़ पार्टी कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप के प्रवक्ता जगतार सिंह संघेड़ा ने कहा कि यह पंजाब सरकार के लिए गर्व की बात है कि इस साल वायु गुणवत्ता सूचकांक पिछले साल की तुलना में 22.8 प्रतिशत बेहतर है। 2021 की दिवाली की तुलना में 2022 में वायु गुणवत्ता सूचकांक 7.6 प्रतिशत बेहतर था और इस साल इसमें और सुधार दर्ज किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप नेता बब्बी बादल और बिक्रमजीत पासी भी उपस्थित थे।
2021 में दिवाली के दिन सुबह 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक वायु गुणवत्ता सूचकांक 268 था, जबकि पिछले वर्ष वायु गुणवत्ता सूचकांक 224 था, इस वर्ष यह 207 दर्ज किया गया।
संघेड़ा ने कहा कि यह मान सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में छह शहरों, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, खन्ना, मंडी गोबिंदगढ़ और पटियाला में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए हैं, जो लगातार वायु गुणवत्ता की निगरानी करते हैं और सटीक डेटा एकत्र करते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई है, जो बेहतर वायु गुणवत्ता का एक बड़ा कारक है। मान सरकार पहले दिन से ही पंजाब के संसाधनों, पानी, हवा और मिट्टी को बचाने और राज्य में पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए पूरी लगन से काम कर रही है। लगभग 1 लाख 40 हजार मशीनें वितरित की गई हैं जिनका उपयोग धान की पराली प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। इन मशीनों पर सहकारी समितियों और गैर सरकारी संगठनों को 80 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है और व्यक्तियों को 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। अधिक से अधिक संगठनों और सोसायटियों को इन मशीनों को खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को पर्यावरण को बचाने के लिए शिक्षा, जागरूकता और साधन मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पराली का उपयोग जैव ईंधन के उत्पादन में किया जा रहा है और किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिल रहे हैं।
संघेड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार की मशीनरी और सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय है। पंजाब सरकार और सीएम भगवंत मान की व्यक्तिगत रुचि और प्रबंधन के कारण पराली जलाने की 70 प्रतिशत कम घटनाएं दर्ज की गईं, पूसा-44 जैसी किस्मों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हमारा लक्ष्य पराली जलाने की घटनाएं खत्म करना है।

केंद्र को मूंगी और मक्का जैसी अन्य फसलों पर भी देना चाहिए एमएसपी
आप प्रवक्ता ने केंद्र सरकार से भी इसी तरह के कदम उठाने का आग्रह किया ताकि इस समस्या को ठीक से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र को मसूर, मक्का समेत 22 फसलों पर एमएसपी देना चाहिए और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार की मदद करनी चाहिए।

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