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भाजपा के हुए जाखड़

पंजाब के खानदानी कांग्रेसी के रूप में अपनी पहचान रखने वाले कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कांग्रेस के ‘हाथ’ को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने जाखड़ को भाजपा की सदस्यता दिलवाई। सुनील जाखड़ ने भाजपा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके लिए यह फैसला लेना आसान नहीं था। कांग्रेस के साथ तीन पीढिय़ों और 50 वर्षों का नाता था। मैंने राजनीति को निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल नहीं किया। जाखड़ ने शायराना अंदाज में कहा ‘हमने रिश्तों को निभाया है उसुलों की तरह, उसूल ही टूट जाएं’ तो सोचना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि 50 साल तक कांग्रेस में रहे जाखड़ ने 14 मई को कांग्रेस को ‘गुड बाय’ बोल दिया था। कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए जाखड़ ने कहा कि आतंकवाद के दिनों में पंजाब की अखंडता को एके-47 की गोलियां भी नहीं तोड़ पाई, लेकिन उसे तोडऩे की कोशिश की गई। जाखड़ ने कांग्रेस हाईकमान और अंबिका सोनी का नाम लिए बिना कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा, आप पंजाब को जाति-पाति की संख्या से नहीं बांट सकते हैं। पंजाब में कोई भी जाति व धर्म सेकेंड क्लास नहीं है। मेरी आवाज को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन मेरी आवाज राष्ट्रीयता के लिए उठेगी। जाखड़ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि मेरी हमेशा ही इच्छा रही है कि पंजाब को विशेष राज्य का दर्जा मिले। कागजी रूप से भले ही यह नहीं हो पाया हो, लेकिन प्रधानमंत्री ने पंजाब को विशेष राज्य का दर्जा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब करतारपुर कारिडोर का शुभारंभ करने के लिए पंजाब आए थे, तब उनसे मुलाकात हुई थी। एक मुलाकात में 50 वर्ष के रिश्ते नहीं तोड़े जाते लेकिन जब प्रधानमंत्री ने लाल किले में हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी का 401वां प्रकाश पर्व मनाया, उस दिन उनके विरोधियों ने भी उनकी प्रशंसा की। उसी दिन मैं समझ गया था कि प्रधानमंत्री ने पंजाब की नब्ज को पकड़ लिया है। धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करने वाले गुरु का लाल किले में 400 वर्षीय प्रकाश पर्व मनाकर एक मील पत्थर स्थापित कर दिया है।
पिछले दिनों जब जाखड़ ने कांग्रेस को अलविदा कहा था तब फेसबुक पेज पर ऑनलाइन होकर पार्टी की खराब हालत के लिए अंबिका सोनी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और हरीश रावत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। जाखड़ ने अंबिका सोनी का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी को उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी, वहीं सोनिया गांधी द्वारा उन्हें विभिन्न पदों से हटाए जाने का नोटिस भेजे जाने पर यह कहते हुए सवाल खड़ा किया था कि उनके पास तो कोई पद था ही नहीं। जाखड़ ने राहुल गांधी पर सवाल उठाए कि वह चापलूसों से घिरे हुए हैं और सही फैसले नहीं ले पा रहे। हरीश रावत द्वारा पंजाब कांग्रेस के भीतरी विवादों में निभाई गई भूमिका पर भी जाखड़ ने सवाल उठाए। अंबिका सोनी को निशाने पर लेते हुए जाखड़ ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोडऩे के बाद सोनी के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने यहां तक कहा कि हैरानी की बात है कि मेरे खिलाफ नोटिस जारी करवाने में जिसने अहम भूमिका निभाई, वह आज पार्टी अध्यक्ष की आंखों का तारा है और यही नेता 1977 में इंदिरा गांधी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया करती थीं। उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि दिल्ली में बैठे नेता जिन्हें पंजाब के कल्चर के बारे में कुछ पता ही नहीं है, उन्होंने सिख कौम को यह कहकर अपमानित किया कि अगर पंजाब में कोई हिंदू मुख्यमंत्री बना तो आग लग जाएगी। यह पंजाब का अपमान है। जाखड़ ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव अपने आप में बहुत कुछ कह रहे हैं। सिखों ने अकाली दल को वोट नहीं डाली, हिंदुओं ने भाजपा को वोट नहीं डाली, दलितों ने कांग्रेस को वोट नहीं डाली, वोट पड़ी तो बदलाव को। कांग्रेस को इस पर चिंतन करना चाहिए।
सुनील जाखड़ के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने जाखड़ को बधाई देते हुए कहा कि ‘सही पार्टी में सही आदमी।’ उन्होंने यह भी कहा कि अन्य नेताओं द्वारा कांग्रेस के डूबते जहाज को छोडऩे का काम आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस से बड़े नेताओं के निकलने का सिलसिला जारी रहेगा और पार्टी आसन्न विनाश की ओर बढ़ रही है। उनके (सुनील) जैसे सच्चे और ईमानदार नेता अब कांग्रेस में सांस नहीं ले सकते थे। उन्होंने कहा कि जब सुनील प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे तब मैं मुख्यमंत्री था और एक साल से भी कम समय पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। हम पंजाब में फिर से सरकार बनाने जा रहे थे। कांग्रेस नेतृत्व का परिवर्तन का फैसला पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हुआ है। देश के अन्य हिस्सों की तरह अब पंजाब में भी कांग्रेस समाप्ति की ओर बढ़ रही है।
कै. अमरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के भविष्य को लेकर जो कहा है, उस बात में दम है। आखिर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को आत्मचिंतन करना होगा। क्यों एक के बाद एक नेता कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो रहा है। जाखड़ से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, हेमंता विस्वा सरमा, पेमा खांडू और अब हार्दिक पटेल प्रदेश और देश की राजनीति में नाम रखने वाले कांग्रेसी नेताओं का कांग्रेस को छोडऩे के प्रमुख कारणों में से एक है। राष्ट्रीय नेतृत्व, गांधी परिवार स्वयं में उलझा हुआ है। जिस कारण पार्टी के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति बनाने में असफल हो रहा है, कांग्रेस के युवा और परिपक्व नेताओं को राष्ट्र स्तर पर पार्टी बंद दरवाजा ही दिखाई देती है। इसलिए अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए वह भाजपा में शामिल होते चले जा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्र स्तर का नेतृत्व अपने संकल्पों और भावों दोनों में स्पष्ट है तथा पार्टी में परिवारवाद न होने के कारण सभी को राष्ट्रीय राजनीति में आने के लिए भाजपा में खुला दरवाजा ही दिखाई देता है।
संगठनात्मक स्तर पर भी भाजपा जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कांग्रेस से कहीं अधिक मजबूत व सक्रिय है। यही कारण है कि भाजपा समय बीतने के साथ मजबूत होती जा रही है। 2009 में भाजपा को 7.8 करोड़ मत मिले थे, तो 2019 के चुनाव में भाजपा को 22.9 करोड़ मत मिले थे। इसके विपरीत कांग्रेस में एक ठहराव आ चुका है। कांग्रेस 2009 से लेकर 2019 तक 10 से 11 करोड़ मत तक ही सीमित रही है।
कांग्रेस में आया ठहराव शायद एक बार फिर कांग्रेस विभाजन के साथ ही टूट सकता है। गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस का देश की राजनीति में पुन: उभर पाना मुश्किल है। क्योंकि कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में धीरे-धीरे निराशा व हताशा हावी होती जा रही है। ऐसी स्थिति में जाखड़ का कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाना एक उचित निर्णय ही माना जाएगा।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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